रिपोर्ट: अनूप पासवान
कोरबा: 26 मार्च को नवरात्रि की पंचमी तिथि पड़ रही है. नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है. स्कंदमाता भक्तों को सुख-शांति प्रदान करने वाली देवी हैं. मान्यता के अनुसार, देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है. इस नवरात्रि स्कंदमाता का विशेष फल पाने के लिए किस तरह से पूजन किया जाना चाहिए, पंडित अमरनाथ द्विवेदी से जानिए.
पंडित अमरनाथ द्विवेदी ने बताया कि नवरात्रि की पंचमी तिथि को स्कंदमाता की पूजा विशेष फलदायी होती है. यह शक्ति परम शांति और सुख का अनुभव कराती है. पंडितजी ने दावा किया कि मां की कृपा से बुद्धि में वृद्धि और ज्ञान रूपी आशीर्वाद मिलता है. सभी तरह की व्याधियों का भी अंत हो जाता है. स्कंदमाता की पूजा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों कामनाओं की पूर्ति होती है.
माता-पिता से पुत्र का मनमुटाव होगा दूर
नवदुर्गा की पांचवीं स्वरूप मां स्कंदमाता भक्तों की सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली देवी हैं. अगर घर में किसी तरह का क्लेश हो खासकर पुत्र अगर माता-पिता की बात न सुनता हो या माता-पिता के साथ पुत्र की नहीं बनती हो तो स्कंदमाता की पूजा से घर में शांति लौट आएगी. पुत्र को सद्बुद्धि प्राप्त होगी. जिससे वह माता-पिता की बातों का अनुसरण करने लगेगा.
पंचमी को लगाएं खीर और केले का भोग
श्रीमद् देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां की पांचवीं विश्वरूप स्कंदमाता को केले और खीर का भोग लगाना चाहिए. जिससे माता प्रसन्न होकर भक्तों द्वारा मांगी गई सभी मनोकामना को पूर्ण करती हैं. वहीं, मध्य रात्रि में माता का पूजा करना विशेष फलदायी रहता है. रात्रि के वक्त विशेष अनुष्ठान करते हुए माता के नवार्ण मंत्र का जाप करना चाहिए.
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