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Chaitra Navratri 2020: नवरात्र के पहले दिन इस विधि से करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानें मां की महिमा

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Updated: March 23, 2020, 2:09 PM IST
Chaitra Navratri 2020: नवरात्र के पहले दिन इस विधि से करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानें मां की महिमा
प्रतिपदा पर मां शैलपुत्री के स्वरूप का पूजन होता है

चैत्र नवरात्र २०२० (Chaitra Navratri 2020): प्रतिपदा पर मां शैलपुत्री के स्वरूप का पूजन होता है. शैलपुत्री को देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में प्रथम माना गया है.

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  • Last Updated: March 23, 2020, 2:09 PM IST
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चैत्र नवरात्र २०२० (Chaitra Navratri 2020): चैत्र नवरात्र 25 मार्च से शुरू हो रहे हैं. नवरात्र के 9 दिनों तक भक्त मां शक्तिस्वरूपा दुर्गा के 9 रूपों की आराधना करते हैं. नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री देवराज हिमालय की पुत्री हैं. मां का यह स्वरुप काफी शांत और शीतल माना जाता है.

नवरात्र के पहले दिन यानी कि प्रतिपदा को मां शक्ति के प्रथम स्वरुप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना करने वाले जातक का चंद्र दोष शांत होता है. आइए जानते हैं मां शैलपुत्री का मंत्र और मां शैलपुत्री के बारे में....

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मां शैलपुत्री का जन्म हुआ ऐसे:



पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सती ने जब देवराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया तो उनका नाम शैलपुत्री रखा गया. पौराणिक कथा के अनुसार, सती भगवान शिव की पहली पत्नी और राजा दक्ष की पुत्री थीं. लेकिन जब एक बार दक्ष ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया और उसमें सभी देवी देवताओं को बुलाया किन्तु अपने दामाद भगवान शिव और बेटी सती को आयोजन में नहीं आमंत्रित किया। इसपर देवी सती दुखी हो गईं और उन्होंने भगवान शिव से पिता द्वारा आयोजित किये गए यज्ञ में जाने की आज्ञा मांगी। लेकिन भगवान शिव ने उन्हें समझाते हुए बिना निमंत्रण के जाने के लिए मना किया। लेकिन इसपर भी जब देवी सती बार बार आग्रह करने लगीं तो अंततः भगवान शिव ने उन्हें यज्ञ में जाने की आज्ञा दे दी. यज्ञ में जाने पर सती का घोर अपमान हुआ. इससे आहत होकर देवी सती ने यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने प्राण दे दिए. इसके बाद भगवान शिव महाकाल रूप में प्रकट हुए अपनी क्रोधाग्नि से सबकुछ नष्ट करने लगे. लेकिन अंततः देवी देवताओं की प्रार्थना पर वो शांत हुए. देवी सती ने अगला जन्म हिमालय की पुत्री के रूप में लिया।

मां शैलपुत्री के मंत्र:
नवरात्र की प्रतिपदा तिथि को मां मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना करते वक्त इन मन्त्रों का पाठ करें।
1. ऊँ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:
2. वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
3. वन्दे वांछित लाभाय चन्द्राद्र्वकृतशेखराम्। वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्॥
4. या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ मां

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: March 23, 2020, 9:07 AM IST
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