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चाणक्य नीति: संकट में हों तो ऐसे व्‍यक्ति पर कभी न करें भरोसा, रखें ये 5 बातें ध्‍यान

Chanakya Niti: मृत्यु हर दम निकट है. इसीलिए पुण्य कर्म करते रहने चाहिए.

चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्‍य (Acharya Chanakya) के अनुसार जो दूसरों के काम में अड़ंगे डालता है और जो लोगों से घृणा करता है. ऐसा व्‍यक्ति बोलते समय मुंह में मिठास और ह्रदय में क्रूरता रखता है.

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    चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) ने चाणक्य नीति में जीवन से जुड़े अहम पहलुओं पर रोशनी डाली है. इसमें उन्‍होंने जीवन की कुछ समस्‍याओं के समाधन की ओर भी ध्‍यान दिलाया है. चाणक्य नीति के अनुसार एक दुष्ट व्यक्ति में पवित्रता नहीं हो सकती. उसे चाहे जैसे समझा लो. जैसे कि नीम का वृक्ष कभी मीठा नहीं हो सकता आप चाहे उसकी शिखा से मूल तक घी और शक्कर छिड़क दें. मगर उसका वही स्‍वभाव बना रहेगा. इसके अलावा इसमें कुछ अन्‍य महत्‍वपूर्ण बातें भी इसमें बताई गई हैं. जीवन में इनका पालन करके व्‍यक्ति अपना लक्ष्‍य पा सकता है और अपना गृहस्थ जीवन सुखी बनाए रख सकता है. आप भी जानिए इसकी खास बातें.

    जरूरी हैं अच्‍छे कार्य
    चाणक्‍य नीति के अनुसार को सदा अच्‍छे कार्य करने चाहिए. वहीं उन्‍होंने आगे कहा है कि धन में कोई स्थायी भाव नहीं है. मृत्यु हर दम हमारे निकट है. इसीलिए हमें तुरंत पुण्य कर्म करने चाहिए. इससे ही जीवन बेहतर बनाया जा सकता है.

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    दया को बनाएं परम मित्र
    आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि सत्य मेरी माता है और अध्यात्मिक ज्ञान मेरा पिता है. इसी तरह धर्माचरण मेरा बंधु है और दया मेरा परम मित्र है. ऐसे ही मन के भीतर की शांति मेरी पत्नी है और क्षमा मेरा पुत्र है. वे कहते हैं कि मेरे परिवार में ये 6 सदस्‍य हैं.

    ऐसा व्यक्ति सत्य नहीं बोल बोलता
    चाणक्‍य नीति के अनुसार जो व्‍यक्ति घर गृहस्थी के काम में लगा रहता है वह कभी ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता. इसी तरह लोभी व्यक्ति कभी सत्य नहीं बोल सकता और एक शिकारी में कभी शुद्धता नहीं हो सकती.

    दुष्ट में पवित्रता नहीं होती
    चाणक्‍य नीति के अनुसार एक दुष्ट व्यक्ति में पवित्रता नहीं हो सकती. उसे चाहे जैसे समझा लो. जैसे कि नीम का वृक्ष कभी मीठा नहीं हो सकता आप चाहे उसकी शिखा से मूल तक घी और शक्कर छिड़क दें. मगर उसका वही स्‍वभाव बना रहेगा.

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    जो दूसरों से घृणा करता है
    वह व्‍यक्ति जो दूसरों के काम में अड़ंगे डालता है, जो दम्भी है, स्वार्थी है, धोखेबाज है, दूसरे लोगों से घृणा करता है. ऐसा व्‍यक्ति बोलते समय मुंह में मिठास और ह्रदय में क्रूरता रखता है. इससे बचके रहना चाहिए. साभार/हिंदी साहित्‍य दर्पण (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
    Published by:Naaz Khan
    First published: