चाणक्य नीति: आचार्य चाणक्‍य ने अपमान को बताया मृत्‍यु समान, लोभ को कहा दुर्गुण

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्‍य केअनुसार दुष्ट व्यक्ति पूर्ण रूप से विष से भरा होता है.

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्‍य केअनुसार दुष्ट व्यक्ति पूर्ण रूप से विष से भरा होता है.

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के अनुसार सांप के दंश में विष होता है. कीड़े के मुंह में विष होता है. बिच्छू के डंक में विष होता है, लेकिन दुष्ट व्यक्ति तो पूर्ण रूप से विष से भरा होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 9:38 AM IST
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Chanakya Niti: चाणक्य नीति आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) की नीतियों का संग्रह है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है. चाणक्य नीति द्वारा मित्र-भेद से लेकर दुश्मन तक की पहचान और जीवन में सफल होने के संबंध में अहम बाते बताई गई हैं. आचार्य चाणक्य एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाते हैं. उन्‍होंने नीति शास्त्र में अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर जीवन की हर परिस्थिति का सामना करने और सुख-दुख में विचलित न होने के लिए कई महत्‍वपूर्ण बातें बताईं और सफलता (Success) पाने के भी कई मंत्र बताए हैं. चाणक्य नीति के माध्‍यम से उन्‍होंने कहा है कि अगर स्वभाव अच्छा है, तो और किसी गुण की जरूरत नहीं है. अगर कीर्ति है, तो अलंकार की क्या जरूरत है. अगर ज्ञान है, तो दौलत की क्या जरूरत है. आप भी जानिए आचार्य चाणक्‍य की ये खास बातें-

साथ रहती हैं जन्मों की अच्छी आदतें

नीति शास्त्र में आचार्य चाणक्‍य ने बताया है कि पहले के जन्मों की अच्छी आदतें जैसे दान, विद्यार्जन और तप इस जन्‍म में भी चलती रहती हैं, क्योंकि सभी जन्‍म एक शृंखला से जुड़े हुए हैं.

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दूसरों से मिली मदद को लौटाना चाहिए

आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि हमें दूसरों से जो मदद प्राप्त हुई है, उसे हमें लौटाना चाहिए. उसी प्रकार यदि किसी ने हमसे दुष्टता की है, तो हमें भी उससे दुष्टता करनी चाहिए. ऐसा करने में कोई पाप नहीं है.

तप से ऊपर कुछ नहीं है



चाणक्‍य नीति कहती है कि वह चीज जो दूर दिखाई देती है, जो असंभव दिखाई देती है, जो हमारी पहुंच से बाहर दिखाई देती है, वह भी आसानी से हासिल हो सकती है, अगर हम तप करते है, क्योंकि तप से ऊपर कुछ नहीं है.

निंदा से बड़ा कोई पाप नहीं

नीति शास्त्र में कहा गया है कि लोभ से बड़ा दुर्गुण क्या हो सकता है. पर निंदा से बड़ा पाप क्या है. जो सत्य में प्रस्थापित है उसे तप करने की क्या जरूरत है. जिसका ह्रदय शुद्ध है, उसे तीर्थ यात्रा की क्या जरूरत है. अगर स्वभाव अच्छा है, तो और किस गुण की जरूरत है. अगर कीर्ति है, तो अलंकार की क्या जरूरत है. अगर व्यवहार ज्ञान है, तो दौलत की क्या जरूरत है और अगर अपमान हुआ है, तो मृत्यु से भयंकर नहीं है क्या.

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दुष्ट व्यक्ति पूर्ण रूप से विष से भरा

आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि सांप के दंश में विष होता है. कीड़े के मुंह में विष होता है. बिच्छू के डंक में विष होता है, लेकिन दुष्ट व्यक्ति तो पूर्ण रूप से विष से भरा होता है. साभार/हिंदी साहित्‍य दर्पण (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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