Chanakya Niti: आचार्य चाणक्‍य ने बताए सफलता के ये 5 मंत्र, आप भी जानें

आचार्य चाणक्‍य ने परेशानियों के समाधन भी बताए हैं.
आचार्य चाणक्‍य ने परेशानियों के समाधन भी बताए हैं.

चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य के अनुसार बुद्धिमान व्यक्ति बगुले की तरह अपनी इन्द्रियों को अपने वश में करते हुए अपने लक्ष्य पर नजर रखता है...

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  • Last Updated: November 1, 2020, 11:03 AM IST
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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर जहां जीवन की हर परिस्थिति का सामना करना और सुख दुख में विचलित न होने के लिए कई महत्‍वपूर्ण बातें बताई हैं, वहीं उन्‍होंने सफलता पाने के भी कई मंत्र बताए हैं. इनका अमल करने से व्यक्ति जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को छू सकता है. चाणक्य नीति (Chanakya Niti) में आचार्य चाणक्य द्वारा वर्णित नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं. आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य के अनुसार सफल होने के लिए व्‍यक्ति को किन चीजों से बचना बचना चाहिए और किन गुणों को खुद में विकसित करना चाहिए. ताकि वह सुखी जीवन व्‍यतीत कर सके. आप भी जानिए ये महत्‍वपूर्ण बातें-

जीवन में सदा रहें संतुष्ट
नीति शास्त्र के अनुसार गधे का जीवन में तीन बातें सिखाता है. एक यह कि अपना बोझा ढोना न छोड़ें, दूसरी यह कि जब कोई कार्य करें तो सर्दी गर्मी की चिंता न करें और तीसरा यह कि जीवन में सदा संतुष्ट रहें.

अपने लक्ष्य पर रखें नजर
आचार्य चाणक्य के अनुसार बुद्धिमान व्यक्ति अपनी इन्द्रियों को बगुले की तरह अपने वश में करते हुए अपने लक्ष्य पर नजर रखता है. ताकि वह अपने लक्ष्‍य से बिल्‍कुल भी डिगे नहीं.



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मूर्ख को न बनाएं शिष्‍य
नीति शास्त्र के अनुसार जीवन में कुछ बातों का ध्‍यान जरूर रखना चाहिए. किसी पापी का मित्र होने से बेहतर है कि व्‍यक्ति बिना मित्र के ही रहे. इसी तरह किसी मूर्ख का गुरु होने से बेहतर है कि गुरु बिना शिष्य वाला ही रहे.

विद्वान सत्‍य से संतुष्ट होते हैं
आचार्य चाणक्य के अनुसार किसी लालची व्‍यक्ति को उपहार आदि देकर संतुष्ट करें. कठोर व्‍यक्ति को हाथ जोड़कर संतुष्ट करें. इसी तरह किसी मूर्ख को सम्मान देकर संतुष्ट किया जा सकता है, लेकिन एक विद्वान व्‍यक्ति सच बोलने से ही संतुष्ट हो जाता है.

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व्‍यक्ति कर्मों के परिणाम भोगता है
नीति शास्त्र में कई महत्‍वपूर्ण बातें बताई गई हैं. इसके अनुसार व्‍यक्ति अपने ही भले और बुरे कर्मों के परिणाम भोगता है. अपने ही कर्मो से वह संसार में बंधता है और अपने ही कर्मो से बन्धनों से छूटता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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