Chanakya Niti: चाणक्‍य नीति में दुर्जन को बताया सर्प से भी खतरनाक और कही ये बात

Chanikya Niti: चाणक्य नीति को रखें ध्यान प्रसन्नता से भरा रहेगा जीवन
Chanikya Niti: चाणक्य नीति को रखें ध्यान प्रसन्नता से भरा रहेगा जीवन

चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य के अनुसार बुरा व्‍यक्ति सर्प से भी बुरा होता है, जो पग-पग पर हानि पहुंचाने का प्रयास करेगा...

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2020, 10:49 AM IST
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चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य बहुत विद्वान व्यक्ति थे. उनकी बुद्धि बहुत कुशाग्र थी और उन्हें विभिन्न विषयों की गहरी समझ भी थी. उन्‍होंने सुखमय जीवन बिताने के कई उपाय बताए हैं. वहीं धन के साथ प्रगति करने के बारे में भी खास बातें कही हैं. इसके अलावा वैवाहिक जीवन को सफल बनाने और शत्रुओं से बचाव के भी कई उपाय समेत कई विषयों से जुड़ी समस्याओं का जिक्र किया है. आज हम आपके लिए 'हिंदी साहित्य दर्पण' के साभार से लेकर आए हैं आचार्य चाणक्य की कुछ नीतियां. आचार्य चाणक्य के अनुसार दुर्जन यानी बुरा व्‍यक्ति सर्प से भी खतरनाक है, क्‍योंकि वह पग-पग पर हानि पहुंचाने का प्रयास करेगा. उनकी कई गई ये खास बातें सफल जीवन जीने और शत्रुओं से बचे रहने में मदद करेंगी. आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ महत्‍वपूर्ण बातें-

मनुष्य की पहचान उसके आचरण से होती है
मनुष्य के कुल की ख्याति उसके किए जाने वाले आचरण से ही होती है. मनुष्य जो भी बोलता है, उससे उसके देश की ख्याति बढ़ती है. मान सम्मान, प्रेम बढ़ता है. इसी तरह उसे संतुलित भोजन से व्‍यक्ति के शरीर का विकास होता है.

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पुत्र को देनी चाहिए अच्‍छी शिक्षा


आचार्य चाणक्य के अनुसार लड़की का विवाह अच्छे खानदान में करना चाहिए. इसके साथ ही पुत्र को अच्‍छी शिक्षा देनी चाहिए. साथ ही शत्रु को कष्टों में डालना चाहिए, ताकि वे आपके अहित की सोच न सकें. इसके अलावा अपने मित्रों को धर्म कर्म में लगाना चाहिए.

दुर्जन है सर्प से भी बुरा
चाणक्‍य नीति में बुरे व्‍यक्ति के बारे में भी बताया गया है. इसमें दुर्जन को सर्प से भी बुरा बताया गया है. इसमें कहा गया है कि एक दुर्जन और एक सर्प में यह अंतर है कि सांप तभी डंक मारेगा जब उसकी जान को खतरा हो, लेकिन दुर्जन पग पग पर हानि पहुंचाने का प्रयास करता रहेगा.

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मूर्ख की मित्रता ह्रदय को छलनी करती है
आचार्य चाणक्य के अनुसार मूर्खो के साथ मित्रता नहीं रखनी चाहिए. उन्हें त्याग देना ही उचित है. इसमें मूर्खों के बारे में कहा गया है कि वे प्रत्यक्ष रूप से दो पैरों वाले पशु के समान हैं, जो अपने धारदार वचनो से वैसे ही हदय को छलनी करता है, जैसे अदृश्य कांटा शरीर में घुसकर पैरों को घायल कर देता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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