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Chanakya Niti: जानें चाणक्‍य नीति में क्‍यों कही ये बात, दुष्ट के साथ दुष्टता करने में नहीं है पाप

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्‍य ने लोभ को सबसे बड़ा दुर्गुण बताया है.

चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के अनुसार दुष्ट व्यक्ति पूर्ण रूप से विष से भरा होता है. उससे बच कर रहने में ही भलाई है.

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    चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में विख्‍यात हुए. चाणक्य नीति कहती है कि व्‍यक्ति को संयमी जीवन व्‍यतीत करते हुए विवादों से बचना चाहिए. चाणक्‍य नीति की कुछ बातें जीवन जीने का तरीका बताती हैं. इसके अनुसार वह चीज जो दूर दिखाई देती है और जिसे पाना असंभव लगता हो, वह भी उचित प्रयासों के जरिये आसानी से हासिल की जा सकती है. आज हम आपके लिए 'हिंदी साहित्य दर्पण' के साभार से लेकर आए हैं आचार्य चाणक्य की कुछ नीतियां. इनको जीवन में उतार कर व्‍यक्ति अपने लक्ष्‍य को पाने में सफल हो सकता है. आप भी जानिए चाणक्‍य नीति की ये खास बातें-

    बिना गुरु कुछ नहीं
    आचार्य चाणक्‍य ने चाणक्‍य नीति में कईमहत्‍वपूर्ण बातें बताई हैं. इसके अनुसार वह विद्वान जिसने असंख्य किताबों का अध्ययन बिना सदगुरु के आशीर्वाद से कर लिया, वह विद्वानों की सभा में एक सच्चे विद्वान के रूप में नहीं चमकता है.

    जो हमें मिला उसे लौटाना चाहिए
    चाणक्‍य नीति कहती है कि हमें दूसरों से जो मदद प्राप्त हुई है, उसे हमें लौटाना चाहिए. इसी प्रकार अगर किसी ने हमसे दुष्टता की है, तो हमें भी उससे दुष्टता करनी चाहिए. ऐसा करने में कोई पाप नहीं है.

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    असंभव भी संभव हो सकता है
    आचार्य चाणक्‍य के अनुसार वह चीज जो दूर दिखाई देती है, जो असंभव दिखाई देती है और जो हमारी पहुंच से बाहर दिखाई देती है, वह भी आसानी से हासिल हो सकती है. अगर हम तप करते है. क्योंकि तप से ऊपर कुछ नहीं.

    लोभ से बड़ा नहीं कोई दुर्गुण
    चाणक्‍य नीति कहती है कि लोभ से बड़ा दुर्गुण क्या हो सकता है. पर निंदा से बड़ा पाप क्या है. जो सत्य में प्रस्थापित है उसे तप करने की क्या जरूरत है. जिसका ह्रदय शुद्ध है, उसे तीर्थ यात्रा की क्या जरूरत है. यदि स्वभाव अच्छा है, तो और किस गुण की जरूरत है. अगर कीर्ति है, तो अलंकार की क्या जरूरत है. अगर व्यवहार ज्ञान है, तो दौलत की क्या जरूरत है.

    समुद्र सभी रत्नों का है भण्डार
    चाणक्‍य नीति में कई महत्‍वपूर्ण बातें बताई गई हैं. इसके अनुसार समुद्र ही सभी रत्नों का भण्डार है. वह शंख का पिता है. देवी लक्ष्मी शंख की बहन है. यह बात सिद्ध होती है की उसी को मिलेगा जिसने पहले दिया है.

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    दुष्ट व्यक्ति विष से भरा
    आचार्य चाणक्‍य के अनुसार सांप के दंश में विष होता है. कीड़े के मुंह में विष होता है. बिच्छू के डंक में विष होता है, लेकिन दुष्ट व्यक्ति तो पूर्ण रूप से विष से भरा होता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
    Published by:Naaz Khan
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