चाणक्‍य नीति: जानें आचार्य चाणक्‍य ने क्‍यों कहा, कठिन समय में काम आते हैं ये लोग

चाणक्‍य नीति: आचार्य चाणक्‍य के अनुसार विद्या एक गुप्त धन है.

चाणक्‍य नीति: आचार्य चाणक्‍य के अनुसार विद्या एक गुप्त धन है.

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के अनुसार अगर आपका शरीर स्वस्थ है और यह आपके नियंत्रण में है, तो ठीक इसी समय आत्म साक्षात्कार का उपाय कर लेना चाहिए, क्योंकि मृत्यु हो जाने के बाद कोई कुछ नहीं कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 21, 2021, 9:40 AM IST
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चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आज के भाग-दौड़ भरे जीवन में आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) की ये नीतियां कठिन समय में व्यक्ति को धैर्य के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं और इनकी मदद से व्यक्ति अच्‍छे और बुरे की पहचान करने में सक्षम हो सकता है. सुख और शांतिपूर्ण जीवन के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं. इन नीतियों पर चल कर जीवन को सरल बनाया जा सकता है. आचार्य चाणक्य एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाते हैं. 'चाणक्य नीति' आचार्य चाणक्य की नीतियों का संग्रह है, जो आज भी प्रासंगिक है. चाणक्‍य नीति कहती है कि विद्या अर्जन करना यह एक कामधेनु के समान है, जो हर मौसम में अमृत प्रदान करती है. वह विदेश में माता के समान रक्षक और हितकारी होती है. इसीलिए विद्या को एक गुप्त धन कहा जाता है. आप भी जानिए चाणक्‍य नीति की ये महत्‍वपूर्ण बातें-

संतजन पुरुषों की संगति

चाणक्‍य नी‍ति कहती है कि जैसे मछली दृष्टी से, कछुआ ध्यान देकर और पंछी स्पर्श करके अपने बच्चों को पालते हैं. इसी तरह संतजन पुरुषों की संगति मनुष्य का पालन-पोषण करती है. इससे व्‍यक्ति सुख शांति भरा जीवन व्‍य‍तीत करता है.

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मृत्यु के बाद कुछ नहीं

आचार्य चाणक्‍य के अनुसार अगर आपका शरीर स्वस्थ है और यह आपके नियंत्रण में है, तो ठीक इसी समय आत्म साक्षात्कार का उपाय कर लेना चाहिए, क्योंकि मृत्यु हो जाने के बाद कोई कुछ नहीं कर सकता है. जो कुछ है इसी जीवन में है.

विद्या अर्जन है बहुत जरूरी 



आचार्य चाणक्‍य के अनुसार विद्या अर्जन करना कामधेनु के समान है, जो हर मौसम में हमें अमृत प्रदान करती है. वह विदेश में माता के समान रक्षक और हितकारी होती है. इसीलिए विद्या को एक गुप्त धन कहा जाता है. इसे जरूर प्राप्‍त करना चाहिए.

ऐसा व्‍यक्ति मूर्ख से बेहतर है

चाणक्‍य नी‍ति के अनुसार एक ऐसा बालक जो जन्मते वक़्त मृत था, एक मूर्ख दीर्घायु बालक से बेहतर है. पहला बालक तो एक क्षण के लिए दुख देता है, दूसरा बालक उसके माता-पिता को जिंदगी भर दुख की अग्नि में जलाता है.

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कठिन समय में मिलता है सहारा

आचार्य चाणक्‍य के अनुसार जब व्यक्ति जीवन के दुख से झुलसता है, तो उसे कुछ खास व्‍यक्तियों का ही सहारा मिलता है. इनमें एक तो पुत्र और पुत्री हैं. इसके अलावा पत्नी भी साथ नहीं छोड़ती. वहीं भगवान के भक्त भी सहारा बनते हैं. साभार/हिंदी साहित्‍य दर्पण (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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