Chanakya Niti: सुखी जीवन के लिए दुष्‍ट लोगों से बनाएं दूरी, जरूर जानें ये 5 बातें

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्‍य कह गए दुष्‍ट लोगों से बनाएं दूरी.

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्‍य कह गए दुष्‍ट लोगों से बनाएं दूरी.

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के अनुसार जिनकी शक्ति आपकी शक्ति के बराबर हो, ऐसे लोगों से विनम्रता से या कठोरता से समझौता करना बेहतर है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 20, 2021, 7:52 AM IST
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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में विख्‍यात हुए. उनकी कुशाग्र बुद्धि और तार्किकता से सभी लोग प्रभावित थे. यही वजह है कि वह कौटिल्य (Kautilya) कहे जाने लगे. उन्‍होंने नीति शास्त्र के माध्‍यम से अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर जीवन की परिस्थितियों का सामना करने और सुख-दुख में विचलित न होने के लिए कई महत्‍वपूर्ण बातों की ओर ध्‍यान दिलाया है. वह कहते हैं कि जिस प्रकार एक फूल में सुगंध है, तिल में तेल है, लकड़ी में अग्नि है, दूध में घी है इसी प्रकार अगर आप ठीक से देखें तो हर व्यक्ति में परमात्मा है. चाणक्य नीति बताती है कि विपरीत परिस्थितियों का कैसे सामना किया जाए और सुखमय जीवन के लिए क्‍या है जरूरी. आचार्य चाणक्य द्वारा वर्णित नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं. आप भी जानिए ये खास बातें-

उसी को मिलता है सम्‍मान

आचार्य चाणक्‍य के अनुसार वह व्यक्ति जिसके पास धन है, उसके पास मित्र और सम्बन्धी भी बहुत रहते हैं. वही इस दुनिया में टिक पाता है और उसी को इस दुनिया में सम्‍मान मिलता है.

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हर व्यक्ति में परमात्मा है

चाणक्‍य नीति के अनुसार जिस प्रकार एक फूल में सुगंध है, तिल में तेल है, लकड़ी में अग्नि है, दूध में घी है, गन्ने में गुड़ है, इसी प्रकार अगर आप ठीक से देखें तो हर व्यक्ति में परमात्मा है.

शक्तिशाली से समझौता करें



चाणक्‍य नीति कहती है कि एक शक्तिशाली आदमी से उसकी बात मानकर समझौता करें. दुष्ट व्‍यक्ति का प्रतिकार करें और जिनकी शक्ति आपकी शक्ति के बराबर है, उनसे समझौता विनम्रता से या कठोरता से करें.

दुष्ट दूसरों के दुख से होते हैं प्रसन्‍न

आचार्य चाणक्‍य के अनुसार दुनिया में कई तरह के लोग होते हैं. जैसे मोर मेघ गर्जना से खुश होते हैं, इसी तरह साधु दूसरों की सम्पन्नता देखकर खुश होते हैं, लेकिन दुष्ट लोग दूसरों की विपदा देखकर प्रसन्‍न होते हैं.

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जहां दुष्ट हो वहां न रहें

आचार्य चाणक्‍य के अनुसार हाथी से हजार गज की दूरी रखें. घोड़े से सौ गज की. इसी तरह सींग वाले जानवर से दस गज की दूरी जरूरी है, लेकिन दुष्ट जहां हो उस जगह से ही निकल जाएं. साभार/हिंदी साहित्‍य दर्पण (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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