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Chanakya Niti: ये 5 बातें गर्भ में हो जाती हैं तय, आप भी जान लें

Chanakya Niti: बुद्धिमान लोग केवल वर्तमान में जीते हैं.

चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्‍य (Acharya Chanakya) के अनुसार यह देवताओं, संत जनों और पालकों का स्वभाव है कि वे जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं.

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    चाणक्य नीति (Chanakya Niti): चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) ने चाणक्य नीति में जीवन से जुड़े अहम विषयों पर प्रकाश डाला है और इनके माध्‍यम से जीवन की कुछ समस्‍याओं के समाधन की ओर भी ध्‍यान दिलाया है. चाणक्‍य नीति कहती है कि हम भविष्य की चिंता भी न करें. विवेक बुद्धि रखने वाले लोग केवल वर्तमान में जीते हैं. इसमें उन्‍होंने सुखी जीवन जीने और जीवन में सफल होने से संबंधित अहम बातें बताई हैं. इनका पालन करके व्‍यक्ति अपने लक्ष्‍य को प्राप्‍त कर सकता है. आज हम आपके लिए 'हिंदी साहित्य दर्पण' के साभार से लेकर आए हैं आचार्य चाणक्य की कुछ नीतियां. इनको जीवन में उतार कर व्‍यक्ति अपना लक्ष्‍य पाने के लिए योग्‍यता प्राप्‍त कर सकता है. आपको भी जरूर जाननी चाहिए ये बातें.

    बुद्धिमान लोग वर्तमान में जीते
    चाणक्‍य नीति कहती है कि अगर आदमी एक पल के लिए भी जिए तो भी वह उस पल को शुभ कर्म करने में खर्च करे. हम उसके लिए न पछताएं जो बीत गया. हम भविष्य की चिंता कभी भी न करें. विवेक बुद्धि रखने वाले लोग केवल वर्तमान में जीते हैं.

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    संत जन जल्दी प्रसन्न होते हैं
    चाणक्‍य नीति के अनुसार यह देवताओं, संत जनों और पालकों का स्वभाव है कि वे जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं. निकट के और दूर के रिश्तेदार तब प्रसन्न होते हैं जब उनका आदर सम्मान किया जाए. उनके नहाने का, खाने पीने का प्रबंध किया जाए. पंडित जन जब उन्हें अध्यात्मिक सन्देश का मौका दिया जाता है तो प्रसन्न होते हैं.

    पांच बातें गर्भ में तय होती हैं
    चाणक्‍य नीति में बताया गया है कि जब बच्चा मां के गर्भ में होता है, तो यह पांच बातें तय हो जाती हैं- कितनी लम्बी उम्र होगी, वह क्या करेगा, कितना धन और ज्ञान अर्जित करेगा और उसकी मृत्‍यु कब होगी.

    आसक्ति रखने वाला दुख को पाता है
    चाणक्‍य नीति के अनुसार जो व्यक्ति अपने घर के लोगों से बहुत आसक्ति रखता है वह भय और दुख को पाता है. आसक्ति ही दुख का मूल है. जिसे सुखी होना है उसे आसक्ति छोड़नी पड़ेगी.

    नसीब के सहारे चलने वाला बर्बाद होता है
    चाणक्‍य नीति कहती है कि जो भविष्य के लिए तैयार है और जो किसी भी परिस्थिति से चतुराई से निपटता है, ये दोनों व्यक्ति सुखी हैं, लेकिन जो आदमी सिर्फ नसीब के सहारे चलता है वह बर्बाद होता है.

    जैसा राजा होगा वैसी प्रजा भी होगी
    आचार्य चाणक्‍य के अनुसार अगर राजा पुण्यात्मा है, तो प्रजा भी वैसी ही होती है. अगर राजा पापी है तो प्रजा भी पापी. यदि वह सामान्य है तो प्रजा सामान्य. प्रजा के सामने राजा का उद्हारण होता है. और वो उसका अनुसरण करती है.

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    दुष्‍ट दूसरों की कीर्ति देखकर जलते हैं
    चाणक्‍य नीति कहती है कि दुष्‍ट लोग दूसरों की कीर्ति को देखकर जलते हैं. वे दूसरे के बारे में अपशब्द कहते हैं, क्योंकि उनकी कुछ करने की औकात नहीं होती. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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