Chanakya Niti: आचार्य चाणक्‍य की ये 5 बातें जो खोलेंगी सफलता के द्वार

Chanakya Niti: इसमें विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी बातें बताई गई हैं.
Chanakya Niti: इसमें विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी बातें बताई गई हैं.

चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति के मन में दूसरों की वस्तु पाने या छीनने की भावना होती है वह हमेशा उसे पाने की योजना बनाने में ही लगा रहता है...

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  • Last Updated: November 11, 2020, 11:46 AM IST
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चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) ने चाणक्य नीति में जीवन से जुड़े अहम पहलुओं पर रोशनी डाली है. वहीं उन्‍होंने जीवन की कुछ समस्‍याओं के समाधन की ओर भी ध्‍यान दिलाया है. इसी तरह उन्‍होंने विद्यार्थियों के लिए भी कुछ बेहद उपयोगी और अद्भुत बातें बताई हैं. जिनका पालन करके कोई भी विद्यार्थी उत्तम और सही रूप से शिक्षा प्राप्त करने में सफल हो सकता है. आज हम आपके लिए 'हिंदी साहित्य दर्पण' के साभार से लेकर आए हैं आचार्य चाणक्य की कुछ नीतियां. इनको जीवन में उतार कर व्‍यक्ति अपना लक्ष्‍य पाने के लिए योग्‍यता प्राप्‍त कर सकता है. हर विद्यार्थी और हर उस व्‍यक्ति को जो जीवन में किसी लक्ष्‍य की ओर अग्रसर है उसे चाहिए कि वह इन खास बातों का जरूर ध्‍यान रखे.

काम भावनाओं से बचाव 
आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति के मन में काम वासना होती है, वह सही-गलत का अंतर नहीं कर पाता. कोई विद्यार्थी अगर काम वासना के चक्कर में पड़ जाए, तो वह पढ़ाई नहीं कर पाता. इसलिए शिक्षा प्राप्‍त कर रहे छात्रों को ऐसी भावनाओं के बचना चाहिए.

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क्रोध पर रखें काबू


चाणक्य नीति के अनुसार क्रोध में व्‍यक्ति को सही गलत की पहचान नहीं रहती. विद्या प्राप्त करने के लिए मन का शांत और एकचित्त होना बहुत जरूरी है. इसलिए मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए.

लोभ है बुरी बला
आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति के मन में दूसरों की वस्तु पाने या हक छीनने की भावना होती है वह हमेशा उसे पाने की योजना बनाने में ही लगा रहता है. ऐसा व्यक्ति अपनी विद्या पर ध्‍यान नहीं लगा पाता. इसलिए विद्यार्थी को मन में लालच की भावना नहीं आने देनी चाहिए.

जीभ को रखें अपने वश में
चाणक्य नीति के अनुसार व्‍यक्ति को अपनी जीभ को अपने वश में रखना चाहिए. वरना व्‍यक्ति हमेशा स्वादिष्ठ व्यंजनों की खोज में लगा रहता है. विद्यार्थी को अपनी जीभ पर कंट्रोल रखना चाहिए, ताकि वह अपने स्वास्थय और अपनी विद्या दोनों का ध्यान रख सके.

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शृंगार में समय न गंवाएं
आचार्य चाणक्य के अनुसार व्‍यक्ति को अपना समय सजने-संवरने में नहीं गंवाना चाहिए. ऐसा व्‍यक्ति कभी भी एक जगह ध्यान केंद्रित करके विद्या नहीं प्राप्त कर पाता. इन परिस्थितियों से बचना चाहिए. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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