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Chanakya Niti: ये कर्म नहीं छोड़ते हैं आपका पीछा, जानें क्‍या कहते हैं आचार्य चाणक्‍य

Chanakya Niti: आज भी आचार्य चाणक्य के बताए गए सिद्धांत प्रासंगिक हैं.
Chanakya Niti: आज भी आचार्य चाणक्य के बताए गए सिद्धांत प्रासंगिक हैं.

चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के अनुसार व्‍यक्ति को कुसंग का त्याग करना चाहिए और संत जनों से मेल-जोल बढ़ाना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 10:39 AM IST
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चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाते हैं. आज भी चाणक्य के बताए गए सिद्धांत और नीतियां प्रासंगिक हैं. जहां उन्‍होंने चाणक्य नीति के माध्‍यम से जीवन की अहम समस्‍याओं के समाधन की ओर ध्‍यान दिलाया है, वहीं जीवन में सफलता प्राप्‍त करने और अपने लक्ष्‍य पर टिके रहने के संबंध में भी महत्‍वपूर्ण बातें बताई हैं. चाणक्‍य नीति कहती है कि कुसंग का त्याग करना और संत जनों से मेल-जोल रखना बेहतर जीवन के लिए जरूरी है. आज हम आपके लिए 'हिंदी साहित्य दर्पण' के साभार से लेकर आए हैं आचार्य चाणक्य की कुछ नीतियां. इनको जीवन में उतार कर व्‍यक्ति सुखी जीवन गुजार सकता है और अपना लक्ष्‍य प्राप्‍त कर सकता है. आप भी जानिए चाणक्‍य नीति की ये बातें-

वही व्यक्ति जीवित, जो है गुणवान
चाणक्‍य नी‍ति कहती है कि वही व्यक्ति जीवित है, जो गुणवान है और पुण्यवान है. लेकिन जिसके पास धर्म और गुण नहीं उसे किस तरह शुभ की कामना दी जा सकती है. क्‍योंकि उसके कर्म उसे अंधकार की ओर ले जाते हैं.

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शक्ति के अनुरूप दूसरों की सेवा करने वाला


आचार्य चाणक्‍य के अनुसार वही पंडित है, जो वही बात बोलता है जो प्रसंग के अनुरूप हो. जो अपनी शक्ति के अनुरूप दूसरों की प्रेम से सेवा करता है और जिसे अपने क्रोध की मर्यादा का पता है.

लम्पट को हर वस्तु में स्त्री दिखती है
चाणक्‍य नीति के अनुसार एक ही वस्तु देखने वालो की योग्यता के अनुरूप बिलग-बिलग दिखती है. तप करने वाले में वस्तु को देखकर कोई कामना नहीं जागती. लम्पट आदमी को हर वस्तु में स्त्री दिखती है. कुत्ते को हर वस्तु में मांस दिखता है.

कोकिल तब तक रहती है मौन
चाणक्‍य नी‍ति कहती है कि कोकिल तब तक मौन रहती है. जब तक वह मीठा गाने की क़ाबिलियत हासिल नहीं कर लेती और सबको आनंद नहीं पहुंचा सकती. इसलिए व्‍यक्ति को स्‍वयं में बेहतर बदलाव करने चाहिए.

आशीर्वाद को बनाए रखें
चाणक्‍य नीति के अनुसार इन चीजों को प्राप्त करें और इन्‍हें बनाए रखें. जैसे हमें हमारे पुण्य कर्म के जो आशीर्वाद मिले. उन्‍हें बनाए रखें. वे शब्द जो हमने हमारे अध्यात्मिक गुरु से सुने. इनको सदैव याद रखें. इन सबको याद रखना जरूरी है, वरना जीवन जीना मुश्किल हो जाएगा.

कुसंग का त्याग करना जरूरी
आचार्य चाणक्‍य के अनुसार व्‍यक्ति को कुसंग का त्याग करना चाहिए और संत जनों से मेलजोल बढ़ाना चाहिए. अपने कर्मों का सदैव चिंतन करते रहें. इससे व्‍यक्ति गलत राह पर जाने से बचा रहेगा.

विद्यार्थी करे गुरु की सेवा
चाणक्‍य नी‍ति कहती है कि अगर व्‍यक्ति उपकरण का सहारा ले, तो वह गर्भजल से पानी निकाल सकता है. उसी तरह अगर विद्यार्थी अपने गुरु की सेवा करे, तो गुरु के पास जो ज्ञान निधि है, उसे प्राप्त कर सकता है.

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अन्न, जल और मीठे वचन असली रत्न
चाणक्‍य नीति के अनुसार इस धरती पर अन्न, जल और मीठे वचन ये ही असली रत्न हैं. मगर मूर्खो को लगता है कि पत्थर के टुकड़े रत्न हैं. व्‍यक्ति के कर्म जैसे भी हों वे सदा उसके पीछे चलते है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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