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Chanakya Niti: ये आदतें व्‍यक्ति को बना देती हैं निर्धन, आपका भी जानना है जरूरी

Chanakya Niti: आज भी चाणक्य के बताए गए सिद्धांत प्रासंगिक हैं.
Chanakya Niti: आज भी चाणक्य के बताए गए सिद्धांत प्रासंगिक हैं.

चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ और प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में विश्व विख्‍यात हुए. उन्‍होंने जीवन में सफल होने और दुष्ट लोगो से बचने के भी उपाय बताए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 25, 2020, 7:03 AM IST
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चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) ने चाणक्य नीति के माध्‍यम से जीवन की कुछ समस्‍याओं के समाधन की ओर भी ध्‍यान दिलाया है. चाणक्‍य नीति जहां भविष्य को उज्‍जवल बनाने के समाधान बताती है, वहीं जीवन में सफल होने और दुष्ट लोगो से बचने के उपाय भी बताए गए हैं. आचार्य चाणक्य एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में विश्व विख्‍यात हुए. आज भी चाणक्य के बताए गए सिद्धांत और नीतियां प्रासंगिक हैं. आज हम आपके लिए 'हिंदी साहित्य दर्पण' के साभार से लेकर आए हैं आचार्य चाणक्य की कुछ नीतियां. इनको जीवन में उतार कर व्‍यक्ति सुखी जीवन गुजार सकता है और सफलता के मार्ग पर चलते हुए अपना लक्ष्‍य प्राप्‍त कर सकता है. आपको भी जरूर जाननी चाहिए ये बातें.

ऐसा व्‍यक्ति कृपा से वंचित रहेगा
चाणक्‍य नीति के अनुसार जो अस्वच्छ कपड़े पहनता है, जिसके दांत साफ़ नहीं और जो कठोर शब्द बोलता है, जो सूर्योदय के बाद उठता है. उसका कितना भी बड़ा व्यक्तित्व क्यों न हो, वह लक्ष्मी की कृपा से वंचित रह जाएगा.

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दुष्ट लोगों से ऐसे होगा बचाव


आचार्य चाणक्‍य के अनुसार कांटो से और दुष्ट लोगों से बचने के दो उपाय हैं. इसके लिए पैर में जूते पहनो ताकि कांटे न चुभें. वहीं दुष्‍ट को इतना शर्मसार करो कि वह अपना सर उठा न सके और आपसे दूर हो जाए.

धन है सबसे अच्छा रिश्तेदार
चाणक्‍य नीति में बताया गया है कि जब व्यक्ति दौलत खोता है, तो उसके मित्र, पत्नी, नौकर, सम्बन्धी उसे छोड़कर चले जाते है और जब वह दौलत वापस हासिल करता है, तो ये सब लौट आते हैं. इसीलिए दौलत ही सबसे अच्छा रिश्तेदार है.

दान वही जो बिना दिखावे के किया जाए
आचार्य चाणक्‍य के अनुसार प्रेम वह सत्य है जो दूसरों को दिया जाता है. खुद से जो प्रेम होता है वह नहीं. वही बुद्धिमत्ता है जो पाप करने से रोकती है. वही दान है, जो बिना दिखावे के किया जाता है.

उसे न हुई आत्मा की अनुभूति
चाणक्‍य नीति में बताया गया है कि एक व्यक्ति को चारों वेद और सभी धर्मं शास्त्रों का ज्ञान है, लेकिन अगर उसे अपनी आत्मा की अनुभूति नहीं हुई, तो वह उसी चमचे के समान है, जिसने अनेक पकवानों को हिलाया, लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा.

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अच्‍छा व्‍यक्ति अपने गुण नहीं छोड़ता
आचार्य चाणक्‍य के अनुसार चन्दन कट जाने पर भी अपनी महक नहीं छोड़ते. हाथी बूढ़ा होने पर भी अपनी लीला नहीं छोड़ता. गन्ना निचोड़े जाने पर भी अपनी मिठास नहीं छोड़ता. इसी प्रकार अच्‍छा व्‍यक्ति अपने उन्नत गुणों को नहीं छोड़ता, भले ही उसे कितनी भी गरीबी में क्यों न बसर करना पड़े. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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