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Chanakya Niti: चाणक्य नीति में बताया जीवन का ये सत्‍य, आपसे भी है इसका संबंध

Chanakya Niti: चाणक्य नीति में बताया जीवन का ये सत्‍य, आपसे भी है इसका संबंध

Chanakya Niti: चाणक्‍य नीत‍ि के अनुसार गरीब वह है जिसके पास विद्या नहीं है.

Chanakya Niti: चाणक्‍य नीत‍ि के अनुसार गरीब वह है जिसके पास विद्या नहीं है.

चाणक्य नीति (Chanakya Niti): चाणक्‍य नीत‍ि के अनुसार जिसके पास विद्या है वह व्‍यक्ति शक्तिशाली है, क्‍योंकि एक छोटा खरगोश आकार में कितना ही छोटा क्‍यों न हो, मगर वह अपनी चतुराई से मदमस्त हाथी को भी तालाब में गिरा देता है.

    चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य ने चाणक्‍य नीति में जीवन से जुड़ी अहम बातों के बारे में बताया है. वह एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में विश्व विख्‍यात हुए. इतनी सदियां गुजरने के बाद आज भी चाणक्य (Acharya Chanakya) के बताए गए सिद्धांत और नीतियां प्रासंगिक हैं, तो इसकी वजह यही है कि उन्होंने अपने गहन अध्‍ययन, चिंतन और जीवन के अनुभवों से अर्जित अमूल्य ज्ञान को चाणक्‍य नीति के माध्‍यम से व्यक्त किया. आज हम आपके लिए 'हिंदी साहित्य दर्पण' के साभार से लेकर आए हैं आचार्य चाणक्य की ऐसी ही कुछ खास नीतियां. सफल जीवन के लिए इनको हर किसी के लिए जानना जरूरी है.

    धन न हो तब भी व्‍यक्ति है शक्तिशाली
    चाणक्‍य नीत‍ि के अनुसार जिस व्‍यक्ति के पास धन नहीं है, वह गरीब नहीं है. गरीब तो वह है जिसके पास विद्या नहीं है. जिसके पास धन न हो, मगर विद्या हो वह असल में अमीर है, लेकिन अगर जिसके पास विद्या नहीं है और धन है, तो वह सब प्रकार से निर्धन है.

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    बोलें वही जो शास्त्र सम्मत हो
    आचार्य चाणक्‍य के अनुसार हमें अपना हर कदम फूंक-फूंक कर यानी सोच समझ कर बढ़ाना चाहिए. हम छाना हुआ जल पिएं. हम वही बात बोलें जो शास्त्र सम्मत हो. हम वही काम करें जिसके बारे में हम सावधानी पूर्वक सोच चुके हैं.

    चन्द्रमा ही उसका शत्रु है
    चाणक्‍य नीत‍ि में बताया गया है कि भिखारी कंजूस आदमी का दुश्मन है. एक अच्छा सलाहकार मूर्ख आदमी का शत्रु है और जो चोर रात को चोरी करने के लिए निकलता है, उसके लिए चन्द्रमा ही उसका शत्रु है.

    वह मनुष्य के रूप में है पशु
    आचार्य चाणक्‍य के अनुसार ऐसा मनुष्‍य जिनके पास विद्या, तप, ज्ञान, अच्छा स्वभाव, गुण, दया भाव नहीं हैं, वे मनुष्‍य धरती पर मनुष्य के रूप में घूमने वाले पशु के समान हैं. वे धरती पर बोझ हैं.

    जिसके पास विद्या वही शक्तिशाली
    चाणक्‍य नीत‍ि के अनुसार जिसके पास विद्या है वह शक्तिशाली है, क्‍योंकि एक छोटा खरगोश आकार में कितना ही छोटा क्‍यों न हो, मगर वह अपनी चतुराई से मदमस्त हाथी को भी तालाब में गिरा देता है.

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    अपनों के छोड़ने का दुख क्‍यों करें
    चाणक्‍य नीत‍ि में बताया गया है कि रात्रि के समय कितने ही प्रकार के पंछी वृक्ष पर विश्राम करते हैं. मगर भोर होते ही सब पंछी दसों दिशाओ में उड़ जाते हैं. इसी तरह हम भला क्यों दुख करें अगर हमारे अपने हमें छोड़कर चले गए. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)undefined

    Tags: Religion

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