• Home
  • »
  • News
  • »
  • dharm
  • »
  • CHANAKYA NITI WILL NOT FAIL IF THESE THINGS ARE TAKEN AWAY IN LIFE DLNK

Chanakya Niti: नहीं चखना पड़ेगा असफलता का स्‍वाद, अगर जीवन में उतार लीं ये बातें 

चाणक्‍य नीति के अनुसार दुष्ट का संग करने से भक्त दूषित नहीं होता.

चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्‍य (Acharya Chanakya) के अनुसार व्‍यक्ति को सदा पुण्‍य कर्म करने चाहिए. दुष्ट के मन में सद्गुणों का उदय हो सकता है, अगर वह एक भक्त से सत्संग करता है.

  • Share this:
    चाणक्य नीति (Chanakya Niti): चाणक्य नीति (Chanakya Niti): आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) ने चाणक्य नीति में जीवन से जुड़े अहम पहलुओं पर रोशनी डाली है. इसमें उन्‍होंने जीवन की कुछ समस्‍याओं के समाधन की ओर भी ध्‍यान दिलाया है. चाणक्य नीति के अनुसार अगर जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होना है तो जिन विषयों के पीछे तुम इन्द्रियों की संतुष्टि के लिए भागते फिरते हो, उन्हें ऐसे त्याग दो जैसे तुम विष को त्याग देते हो. इसके अलावा कुछ अन्‍य महत्‍वपूर्ण बातें भी इसमें बताई गई हैं. आज हम आपके लिए 'हिंदी साहित्य दर्पण' के साभार से लेकर आए हैं आचार्य चाणक्य की कुछ नीतियां. जीवन में इनका पालन करके व्‍यक्ति अपना लक्ष्‍य पा सकता है और अपना गृहस्थ जीवन सुखी बनाए रख सकता है. आप भी जानिए इसकी खास बातों को. क्‍योंकि इतनी सदियां गुजरने के बाद आज भी आचार्य चाणक्य के बताए गए सिद्धांत और नीतियां प्रासंगिक हैं.

    जो मूल में है उसे बदला नहीं जा सकता
    आचार्य चाणक्‍य के अनुसार उसे कोई कैसे बदल सकता है, जो किसी के मूल में है. जिस तरह बसंत ऋतु क्या करेगी अगर बांस पर पत्ते नहीं आते. सूर्य का क्या दोष अगर उल्लू दिन में देख नहीं सकता. बादलो का क्या दोष अगर बारिश की बूंदें चातक पक्षी की चोंच में नहीं गिरतीं.

    इसे भी पढ़ें - Chanakya Niti: चाणक्य नीति में बताया जीवन का ये सत्‍य

    दुष्ट का संग मिलने से भक्त दूषित नहीं होता
    चाणक्‍य नीति के अनुसार एक दुष्ट के मन में सद्गुणों का उदय हो सकता है, अगर वह एक भक्त से सत्संग करता है. लेकिन दुष्ट का संग करने से भक्त दूषित नहीं होता. जमीन पर जो फूल गिरता है, उससे धरती सुगन्धित होती है, लेकिन पुष्प को धरती की गंध नहीं लगती.

    सत्य माता है और अध्यात्मिक ज्ञान पिता
    आचार्य चाणक्‍य के अनुसार सत्य मेरी माता है. अध्यात्मिक ज्ञान मेरा पिता है. धर्माचरण मेरा बंधु है. दया मेरा मित्र है. भीतर की शांति मेरी पत्नी है. क्षमा मेरा पुत्र है. मेरे परिवार में ये छह लोग है.

    इसे भी पढ़ें - Chanakya Niti: ज्ञान का गुप्‍त धन जीवन के लिए अमृत समान

    व्‍यक्ति को सदा पुण्य कर्म करने चाहिए
    चाणक्‍य नीति के अनुसार व्‍यक्ति का शरीर नश्वर है. उसे हर समय अच्‍छे कार्य करने चाहिए. इसमें आगे कहा गया है कि धन में कोई स्थायी भाव नहीं है. मृत्यु हर दम हमारे निकट है. इसीलिए हमें तुरंत पुण्य कर्म करने चाहिए. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
    Published by:Naaz Khan
    First published: