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Chhath puja 2019: सूर्य देव को प्रथम अर्घ्य आज, जलाशयों में खड़े होकर चढ़ेगा प्रसाद

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Updated: November 2, 2019, 2:05 PM IST
Chhath puja 2019: सूर्य देव को प्रथम अर्घ्य आज, जलाशयों में खड़े होकर चढ़ेगा प्रसाद
छठ पूजा को सूर्य उपासना और लोक आस्था का महापर्व भी कहा जाता है.

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को किए जाने वाले व्रत को डाला छठ भी कहते हैं. यह व्रत बड़े नियम और निष्ठा के साथ किया जाता है. व्रती बिना कुछ खाए-पीए व्रत रखती हैं.

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  • Last Updated: November 2, 2019, 2:05 PM IST
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सूर्य देव और छठ मैया की उपासना का पर्व 31 अक्टूबर से ही शुरू हो चुका है. शनिवार यानी आज शाम अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य दिया जाएगा. इसके बाद रविवार की सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ व्रत का पारण होगा. इस अवसर पर हर जगह तालाबों पर विशेष तैयारियां की गई हैं. इस अवसर पर छठ मैया के गीत गाए जाएंगे. कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को किए जाने वाले व्रत को डाला छठ भी कहते हैं. इस व्रत को करने वाली महिलाएं सदैव पति-पुत्र, धन-धन्य और सुख-समृद्धि से परिपूर्ण होती हैं. यह व्रत बड़े नियम और निष्ठा के साथ किया जाता है. व्रती खरना के शाम से लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक बिना कुछ खाए-पीए व्रत रखती हैं. इस बार खरना और अर्घ्य के समय विशेष योग है. शनिवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य के समय रवि योग है. इस योग का संबंध सूर्य देव से है. यह योग सभी बाधाओं को दूर करने वाला है.

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मुख्य प्रसाद ठेकुआ का अर्घ्य

निर्जला व्रत रखकर छठ पूजा करने वाले छठ व्रतियों द्वारा खरना की शाम को गुड़ और चावल से बने खीर का भोग लगाया जाता है. इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. आज शाम छठ व्रती डूबते सूर्य को गेहूं के आटे और गुड़ व शक्कर से निर्मित मुख्य प्रसाद ठेकुआ के अलावा चावल से बने भुसबा, गन्ना, नारियल, केला, हल्दी, सेव, संतरा, फल-फूल हाथों में लेकर जलाशयों में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देंगे. यह व्रत महिला और पुरुष दोनों करते हैं. इसमें शुद्धता और साबिहारफ-सफाई पर काफी ध्यान दिया जाता है. छठ पर्व के तीसरे दिन यानी आज छठव्रती सूर्यास्त के समय नदी, तालाबों या किसी अन्य जलाशय पर पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे. पर्व के चौथे दिन यानी रविवार की सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत समाप्त हो जाएगा. इसके बाद व्रती अन्न-जल ग्रहण करेंगी.

पहला अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त

छठ पूजा के दिन सूर्योदय - 2 नवंबर, 06:33 बजे
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त - 2 नवंबर, 05:35 बजे
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2 नवंबर (संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय- 17:35 बजे
3 नवंबर (उषा अर्घ्य) सूर्योदय का समय- 06:34 बजे

छठ पूजा विधि

छठ पूजा से पहले निम्न सामग्री जुटा लें और फिर सूर्य देव को विधि विधान से अर्घ्य दें.

बांस की 3 बड़ी टोकरी, बांस या पीतल के बने 3 सूप, थाली, दूध और ग्लास, चावल, लाल सिंदूर, दीपक, नारियल, हल्दी, गन्ना, सुथनी, सब्जी और शकरकंदी, नाशपती, बड़ा नींबू, शहद, पान, साबुत सुपारी, कैराव, कपूर, चंदन और मिठाई, प्रसाद के रूप में ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पुड़ी, सूजी का हलवा, चावल के बने लड्डू.

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अर्घ्य देने की विधि

बांस की टोकरी में सभी सामान रखें. सूर्य को अर्घ्य देते समय सारा प्रसाद सूप में रखें और सूप में ही दीपक जलाएं. फिर नदी में उतरकर सूर्य देव को अर्घ्य दें.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: November 2, 2019, 2:05 PM IST
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