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Chhath Puja 2019: छठ के दूसरे दिन होता है खरना, प्रसाद में बनती हैं ये 4 चीजें

News18Hindi
Updated: November 1, 2019, 9:50 AM IST
Chhath Puja 2019: छठ के दूसरे दिन होता है खरना, प्रसाद में बनती हैं ये 4 चीजें
छठ के दूसरे दिन खरना होता है. इस दिन व्रती सुबह से निर्जला व्रत रखकर शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ और चावल की खीर बनाती है.

छठ के व्रत में नदी या तालाब में जाकर डूबकी लगाकर सूर्य भगवान की उपासना की जाती है. साथ ही प्रसाद में मौसमी फल, सब्जियां और अनाज का उपयोग किया जाता है.

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  • Last Updated: November 1, 2019, 9:50 AM IST
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लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ 31 अक्टूबर से ही शुरू हो गया है. देश के कई हिस्सों में यह पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस व्रत में नदी या तालाब में जाकर डूबकी लगाकर सूर्य भगवान की उपासना की जाती है. साथ ही प्रसाद में मौसमी फल, सब्जियां और अनाज का उपयोग किया जाता है. आज व्रती छठ का दूसरा दिन खरना कर रहे हैं. छठी मैया को खुश करने के लिए आज हर व्रती प्रसाद में चार चीजें जरूर रखता है। आइए जानते हैं कौन सी हैं वो चीजें.

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खरना के प्रसाद की 4 चीजें-

छठ के दूसरे दिन खरना होता है. इस दिन व्रती सुबह से निर्जला व्रत रखकर शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ और चावल की खीर बनाती है. खीर के साथ रोटी भी बनती है. रोटी और खीर को मौसमी फल (जिसमें केला जरूर शामिल किया जाता है) और मिठाई के साथ एक केले के पत्ते पर रखकर छठ माता को चढ़ाया जाता है. इसके बाद व्रती खुद भी इस प्रसाद को ग्रहण करके परिवार के बाकी लोगों को भी प्रसाद बांटती है. आपको बता दें कि यह प्रसाद चूल्हें पर आम की लकड़ियों को जलाकर ही बनाया जाता है.

क्या होता है खरना-

सूर्य उपासना का यह लोकपर्व छठ 4 दिनों तक मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है. उसके अगले दिन खरना किया जाता है. खरना का मतलब होता है शुद्धिकरण. दरअसल, छठ का व्रत करने वाले व्रती नहाय खाय के दिन पूरा दिन उपवास रखकर केवल एक ही समय भोजन करके अपने शरीर से लेकर मन तक को शुद्ध करने का प्रयास करते हैं. इसकी पूर्णता अगले दिन समाप्त होती है. यही वजह है कि इसे खरना के नाम से बुलाया जाता है. इस दिन व्रती साफ मन से अपने कुलदेवता और छठ मैया की पूजा करके उन्हें गुड़ से बनी खीर का प्रसाद चढ़ाते हैं. आज के दिन शाम होने पर गन्ने का जूस, गुड़ के चावल या गुड़ की खीर का प्रसाद बनाकर बांटा जाता है. प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का 36
घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है.
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खरना का धार्मिक महत्व-

खरना के दिन जो प्रसाद बनता है, उसे नए चूल्हे पर बनाया जाता है और ये चूल्‍हा मिट्टी का बना होता है. चूल्‍हे पर आम की लकड़ी का प्रयोग करना शुभ माना जाता है. खरना इसलिए भी खास है क्‍योंकि इस दिन जब व्रती प्रसाद खा लेती हैं तो फिर वे छठ पूजने के बाद ही कुछ खाती हैं. खरना के बाद आसपास के लोग भी व्रतियों के घर पहुंचते हैं और मांगकर प्रसाद ग्रहण करते हैं. आपको बता दें कि इस प्रसाद के लिए लोगों को बुलाया नहीं जाता बल्कि लोग खुद व्रती के घर पहुंचते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: November 1, 2019, 9:49 AM IST
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