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Chhath Puja 2019: जानें छठ पूजा की तिथि और विधि, ऐसे करें भगवान सूर्य को खुश

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Updated: October 12, 2019, 2:56 PM IST
Chhath Puja 2019: जानें छठ पूजा की तिथि और विधि, ऐसे करें भगवान सूर्य को खुश
छठ पूजा में सूर्य देव की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है.

छठ पूजा नहाय-खाय के साथ चार दिन तक चलने वाले लोक आस्था और सूर्य की उपासना का महापर्व है. इस साल छठ का पावन पर्व 31 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा.

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  • Last Updated: October 12, 2019, 2:56 PM IST
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छठ पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाता है. यह त्योहार पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है. छठ पूजा नहाय-खाय के साथ चार दिन तक चलने वाले लोक आस्था और सूर्य की उपासना का महापर्व है. इस साल छठ का पावन पर्व 31 अक्टूबर 2019 से शुरू हो जाएगा. पारिवारिक सुख-समृध्दि और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है. छठ पूजा चार दिन का पर्व है. इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को होती है और यह कार्तिक शुक्ल सप्तमी को समाप्त होता है. इस दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं. व्रत के दौरान वह पानी भी ग्रहण नहीं करते हैं.

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छठ पूजा तिथि

31 अक्टूबर 2019- नहाय-खाय

1 नवंबर 2019- लोहंडा और खरना

2 नवंबर 2019- संध्या अर्घ्य

3 नवंबर 2019- सूर्योदय/ ऊषा अर्घ्य और पारण
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36 घंटे तक निराहर व्रत 

इस महापर्व के दिन अगले दिन लोग दिनभर व्रत रखते हैं. इस व्रत को लोग बिना जल और खाने के रखते हैं और सूर्यास्त होने पर खरना करते हैं. इसमें सूर्यदेव की पूजा की जाती है और प्रसाद में दूध और गुड़ से बनी खीर का चढ़ाकर उसे ग्रहण करते हैं. इसके बाद करीब 36 घंटे तक निराहर व्रत किया जाता है. इस महापर्व के तीसरे दिन छठव्रती शाम को नदी, तालाबों में पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं. पर्व के अंतिम दिन यानी कि चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अघ्र्य देने के बाद व्रतधारीयों का व्रत समाप्त हो जाता है. इसके बाद व्रत वाले लोग अन्न-जल ग्रहण करके पारण करते हैं.

छठ पूजा मुहूर्त

2 नवंबर (संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय- 17:35:42
3 नवंबर (उषा अर्घ्य) सूर्योदय का समय- 06:34:11

पूजा का विधान

छठ पूजा में सूर्य देव की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है. सूर्य प्रत्यक्ष रूप में दिखाई देने वाले देवता हैं जो पृथ्वी पर सभी प्राणियों के जीवन का आधार हैं. सूर्य देव के साथ-साथ छठ पर छठी मैया की पूजा का भी विधान है. पौराणिक मान्यता के अनुसार छठी मैया या षष्ठी माता संतानों की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं. शास्त्रों में षष्ठी देवी को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री भी कहा गया है. पुराणों में इन्हें मां कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि पर होती है. षष्ठी देवी को ही
बिहार-झारखंड की स्थानीय भाषा में छठ मैया कहा गया है.

नहाय खाये (पहला दिन)

यह छठ पूजा का पहला दिन है. नहाय खाय से मतलब है कि इस दिन स्नान के बाद घर की साफ-सफाई की जाती है और मन को तामसिक प्रवृत्ति से बचाने के लिए शाकाहारी भोजन किया जाता है.

खरना (दूसरा दिन)

खरना, छठ पूजा का दूसरा दिन है. खरना का मतलब पूरे दिन के उपवास से है. इस दिन व्रत रखने वाला व्यक्ति जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करता है. संध्या के समय गुड़ की खीर, घी लगी हुई रोटी और फलों का सेवन किया जाता है. साथ ही घर के अन्य सदस्यों को इसे प्रसाद के तौर पर दिया जाता है.

संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन)

छठ पर्व के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को संध्या के समय सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है. शाम को बांस की टोकरी में फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू से अर्घ्य का सूप सजाया जाता है, जिसके बाद व्रति अपने परिवार के साथ सूर्य को अर्घ्य देती हैं. अर्घ्य के समय सूर्य देव को जल और दूध चढ़ाया जाता है और प्रसाद भरे सूप से छठी मैया की पूजा की जाती है. सूर्य देव की उपासना के बाद रात्रि में छठी माता के गीत गाए जाते हैं और व्रत कथा सुनी जाती है.

उषा अर्घ्य (चौथा दिन)

छठ पर्व के अंतिम दिन सुबह के समय सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है. इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले नदी के घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इसके बाद छठ माता से संतान की रक्षा और पूरे परिवार की सुख शांति की कामना की जाती है. पूजा के बाद व्रति कच्चे दूध का शरबत पीकर और थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत को पूरा करती हैं जिसे पारण या परना कहा जाता है.

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छठ पूजा विधि

छठ पूजा से पहले निम्न सामग्री जुटा लें और फिर सूर्य देव को विधि विधान से अर्घ्य दें.

बांस की 3 बड़ी टोकरी, बांस या पीतल के बने 3 सूप, थाली, दूध और ग्लास
चावल, लाल सिंदूर, दीपक, नारियल, हल्दी, गन्ना, सुथनी, सब्जी और शकरकंदी
नाशपती, बड़ा नींबू, शहद, पान, साबुत सुपारी, कैराव, कपूर, चंदन और मिठाई
प्रसाद के रूप में ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पुड़ी, सूजी का हलवा, चावल के बने लड्डू

अर्घ्य देने की विधि

बांस की टोकरी में सभी सामान रखें. सूर्य को अर्घ्य देते समय सारा प्रसाद सूप में रखें और सूप में ही दीपक जलाएं. फिर नदी में उतरकर सूर्य देव को अर्घ्य दें.

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First published: October 12, 2019, 2:56 PM IST
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