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Chhath Puja Katha: छठ में पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगी सूर्य भगवान की कृपा!

छठ व्रत कथा (Chhath Puja Katha): पुराने समय में प्रियव्रत नाम के एक राजा थे. उनकी पत्नी का नाम मालिनी था. दोनों की कोई संतान नहीं थी...

छठ व्रत कथा (Chhath Puja Katha): पुराने समय में प्रियव्रत नाम के एक राजा थे. उनकी पत्नी का नाम मालिनी था. दोनों की कोई संतान नहीं थी...

छठ व्रत कथा (Chhath Puja Katha): पुराने समय में प्रियव्रत नाम के एक राजा थे. उनकी पत्नी का नाम मालिनी था. दोनों की कोई संतान नहीं थी...

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    छठ व्रत कथा (Chhath Puja Katha): छठ इस बार 2 नवंबर को पड़ रही है. लेकिन 31 अक्टूबर 2019 से नहाय खाय के साथ कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी से इसकी शुरुआत हो जाएगी. यह व्रत पूरे चार दिन तक चलता है. छठ व्रत ज़्यादातर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई इलाकों में मनाया जाता है. छठ में सूर्य देवता की पूजा अर्चना की जाती है. इस दौरान इस व्रत को करने वाले लोग 36 घंटे का व्रत निर्जल और निराहार रहकर करते हैं. छठ के दिन लोग पवित्र जलाशय में खड़े होकर सूर्य भगवान को अर्घ्य देते हैं. छठ व्रत में पूजा के बाद पढ़ें ये व्रत कथा..

    छठ व्रत कथा (Chhath Puja Katha):
    पुराने समय में प्रियव्रत नाम के एक राजा थे. उनकी पत्नी का नाम मालिनी था. दोनों की कोई संतान नहीं थी. इस बात से राजा और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहते थे. उन्होंने एक दिन संतान प्राप्ति की इच्छा से महर्षि कश्यप द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया. इस यज्ञ के फलस्वरूप रानी गर्भवती हो गईं.

    इसे भी पढ़ेंः Chhath Puja 2019: जानें छठ पूजा की तिथि और विधि, ऐसे करें भगवान सूर्य को खुश

    नौ महीने बाद संतान सुख को प्राप्त करने का समय आया तो रानी को मरा हुआ पुत्र प्राप्त हुआ. इस बात का पता चलने पर राजा को बहुत दुख हुआ. संतान शोक में उन्होंने आत्महत्या का मन बना लिया. लेकिन जैसे ही राजा ने आत्महत्या करने की कोशिश की उनके सामने एक सुंदर देवी प्रकट हुईं.

    देवी ने राजा को कहा कि मैं षष्टी देवी हूं. मैं लोगों को पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं. इसके अलावा जो सच्चे भाव से मेरी पूजा करता है, मैं उसके सभी प्रकार के मनोरथ को पूर्ण कर देती हूं. यदि तुम मेरी पूजा करोगे तो मैं तुम्हें पुत्र रत्न प्रदान करूंगी. देवी की बातों से प्रभावित होकर राजा ने उनकी आज्ञा का पालन किया.

    इसे भी पढ़ेंः Chhath Puja 2019: क्यों मनाया जाता है छठ, क्या है इसके पीछे का इतिहास?

    राजा और उनकी पत्नी ने कार्तिक शुक्ल की षष्टी तिथि के दिन देवी षष्टी की पूरे विधि -विधान से पूजा की. इस पूजा के फलस्वरूप उन्हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई. तभी से छठ का पावन पर्व मनाया जाने लगा.

    छठ व्रत के संदर्भ में एक अन्य कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा. इस व्रत के प्रभाव से उसकी मनोकामनाएं पूरी हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया.

    Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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