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Chhath Puja 2021 Nahay Khay: नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महापर्व, जानें क्‍या किया जाता है इस दिन

Chhath Puja 2021 Nahay Khay: नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महापर्व, जानें क्‍या किया जाता है इस दिन

नहाय-खाय के दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर नदी में डुबकी लगाते हैं जिसके बाद भोजन बनाया जाता है.

नहाय-खाय के दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर नदी में डुबकी लगाते हैं जिसके बाद भोजन बनाया जाता है.

Chhath Puja Nahay Khay: दिवाली के 6 दिन बाद से छठ पूजा (Chhath Puja) का महापर्व शुरू हो जाता है. छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय (Nahay Khay) से होती है. इस दिन व्रती सुबह तैयार होते हैं और घाट पर जाकर नदी में डुबकी लगाते हैं. जिसके बाद भोजन बनाया जाता है. उत्तर भारत में खासतौर से बिहार (Bihar), झारखंड (Jharkhand) और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाये जाने वाले इस महापर्व छठ को लेकर तैयारियां इन दिनों जोर शोर से हो रही हैं. छठ के पहले दिन यानी नहाय-खाय के साथ लोग गंगा में डुबकी लगाकर या गंगा जल छिड़ककर सूर्य देव की पूजा-अर्चना के साथ पूजा की शुरुआत करते हैं.

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    Chhath Puja Nahay Khay: छठ पूजा (Chhath Puja) आस्‍था और संयम का त्‍योहार माना जाता है. छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय (Nahay Khay) के साथ होती है. हिंदू पंचांग (Hindu Panchang) के मुताबिक छठ पूजा कार्तिक माह (Kartik Month) की षष्ठी से शुरू हो जाती है. यह पर्व चार दिनों चलता है. ऐसे में आज नहाय-खाय है. इसके अगले दिन यानी 9 नवंबर को दिन खरना मनाया जाएगा. जबकि 10 नवंबर को सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और अंत में 11 नवंबर की सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस पावन पर्व का समापन हो जाएगा.

    नहाय खाय के साथ होती है छठ व्रत की शुरुआत

    नहाय खाय की सुबह व्रती भोर बेला में उठते हैं और गंगा स्‍नान आदि करने के बाद सूर्य पूजा के साथ व्रत की शुरुआत करते हैं. इसके बाद चना दाल के साथ कद्दू-भात (कद्दू की सब्जी और चावल) तैयार किया जाता है और इसे ही खाया जाता है. इसके साथ ही व्रती 36 घंटे के निर्जला व्रत (Nirjala Vrat) को प्रारंभ करते हैं. नहाय खाए के साथ व्रती नियमों के साथ सात्विक जीवन जीते हैं और हर तरह की नकारात्‍मक भावनाएं जैसे लोभ, मोह, क्रोध आदि से खुद को दूर रखते हैं.

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    नहाय-खाय के साथ इन नियमों का व्रती करते हैं पालन

    – नहाय-खाय के दिन से व्रती को साफ और नए कपड़े पहनने चाहिए.

    – नहाय खाए से छठ का समापन होने तक व्रती को जमीन पर ही सोना चाहिए. व्रती जमीन पर चटाई या चादर बिछाकर सो सकते हैं.

    – घर में तामसिक और मांसाहार वर्जित है. इसलिए इस दिन से पहले ही घर पर मौजूद ऐसी चीजों को बाहर कर देना चाहिए और घर को साफ-सुथरा कर देना चाहिए.

    – मदिरा पान, धुम्रपान आदि न करें. किसी भी तरह की बुरी आदतों को करने से बचें.

    – साफ-सफाई का विशेष ध्यान देना जरूरी होता है. पूजा की वस्तु का गंदा होना अच्छा नहीं माना जाता.

    – महिलाएं माथे पर सिंदूर जरूर लगाएं. सिंदूर नाक से लेकर पूरी मांग भरने की परंपरा है.

    – किसी भी वस्तु को छूने से पहले हाथ जरूरत धोएं.

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    ये है मान्‍यता

    – छठ व्रत अगर संपूर्णता से किया जाए तो मान्यता है कि अच्छी फसल, परिवार की सुख-समद्धि, संतान की लंबी उम्र के लिए रखा गया यह व्रत पूर्ण होता है.

    – पौराणिक कथाओं के मुताबिक छठी मैया को ब्रह्मा की मानसपुत्री और भगवान सूर्य की बहन माना गया है. छठी मैया निसंतानों को संतान प्रदान करती हैं. संतानों की लंबी आयु के लिए भी यह पूजा की जाती है.

    -पौराणिक कथाओं के मुताबिक महाभारत के युद्ध के बाद अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे का वध कर दिया गया था. तब उसे बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा को षष्ठी व्रत (छठ पूजा) रखने की सलाह दी थी.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

     

    Tags: Bihar Chhath Puja, Chhath Puja, Chhath Puja 2021, Religion

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