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Chitragupta Puja 2019: भाई दूज पर होती है चित्रगुप्त महाराज की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Updated: October 29, 2019, 2:18 PM IST
Chitragupta Puja 2019: भाई दूज पर होती है चित्रगुप्त महाराज की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
चित्रगुप्त महाराज देवताओं के लेखपाल यानी मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा करने वाले हैं.

भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी की काया से हुई है. ब्रह्मा जी की काया से संबंध होने के कारण इस वंश को कायस्थ कहा गया.

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  • Last Updated: October 29, 2019, 2:18 PM IST
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चित्रांशों के आराध्य देव भगवान चित्रगुप्त की आज देशभर में धूमधाम से पूजा की जा रही है. भागवान चित्रगुप्त सभी के लेखनी की इच्छा-कामना को सहज ही पूर्ण करते हैं. ऐसे तो चित्रांश सहित कितने ही जन देव श्री चित्रगुप्त की नित्य आराधना किया करते हैं, पर हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को इनका वार्षिक उत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. पद्य पुराण, स्कन्द पुराण, ब्रह्मपुराण, यमसंहिता व याज्ञवलक्य स्मृति सहित कई धार्मिक ग्रंथों में भगवान चित्रगुप्त का विवरण आया है. भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी की काया से हुई है.

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समुद्र मंथन से हुई उत्पत्ति

ब्रह्मा जी की काया से संबंध होने के कारण इस वंश को कायस्थ कहा गया. चित्रगुप्त जी की उत्पत्ति की एक और कथा है कि देवताओं और असुरों ने अमृत के लिए समुद्र मंथन किया था, तो उसमें कुल 14 रत्नों की प्राप्ति हुई थी. उसी में लक्ष्मी जी के साथ चित्रगुप्त जी की भी उत्पत्ति हुई थी. मान्यता है कि भगवान चित्रगुप्त ने ज्वालामुखी, चण्डी देवी व महिषासुर मर्दिनी की पूजा-अर्चना और साधना कर एक आदर्श कायम किया था. देवलोक में भगवान चित्रगुप्त की प्रतिष्ठा धर्मराज के रूप में है.

नई लेखनी या कलम की पूजा

भाई दूज के दिन चित्रगुप्त महाराज की पूजा करने का विधान है. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की ​द्वितीया तिथि यम द्वितीया के नाम से भी प्रसिद्ध है, हर वर्ष इस दिन चित्रगुप्त पूजा की जाती है. इस दिन भाई दूज का त्योहार भी मनाया जाता है. चित्रगुप्त महाराज देवताओं के लेखपाल यानी मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा करने वाले हैं. इस दिन नई लेखनी या कलम को चित्रगुप्त महाराज का प्रतिरूप मानकर पूजा की जाती है. व्यापारी वर्ग के लिए यह नववर्ष का प्रारंभ माना जाता है.

चित्रगुप्त पूजा मुहूर्त
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आज सुबह 11 बजकर 42 मिनट से अभिजीत मुहूर्त है, जो दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक है. आप अभिजीत मुहूर्त में चित्रगुप्त पूजा करें. इसके अलावा आप अमृत काल में भी पूजा कर सकते हैं, जो 03 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.

चित्रगुप्त पूजा विधि

भाई दूज के दिन स्नानादि के बाद पूर्व दिशा में बैठकर एक चौक बनाएं. वहां पर चित्रगुप्त महाराज की तस्वीर स्थापित करें. इसके पश्चात विधिपूर्वक पुष्प, अक्षत्, धूप, मिठाई, फल आदि अर्पित करें. एक नई लेखनी या कलम उनको अवश्य अर्पित करें. कलम-दवात की भी पूजा कर लें. फिर एक कोरे सफेद कागज पर श्री गणेशाय नम: और 11 बार ओम चित्रगुप्ताय नमः लिखें. इसके बाद चित्रगुप्त महाराज से अपने और परिवार के लिए बुद्धि, विद्या और लेखन का अशीर्वाद प्राप्त करें.

चित्रगुप्त प्रार्थना मंत्र

मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्।
लेखिनीपट्टिकाहस्तं चित्रगुप्तं नमाम्यहम्।।

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वैदिक काल से ही भागवान चित्रगुप्त की पूजा-अर्चना की जाती थी लेकिन भारतीय इतिहास के स्वर्णयुग अर्थात् गुप्तकाल से चित्रगुप्त की आराधना व्यापक रूप में होने लगी. उत्तर, दक्षिण, पूरब व पश्चिम भारत में विराजमान चार धामों के समान भगवान चित्रगुप्त के चार धामों का भी उल्लेख आता है जिनमें उज्जैन, कांचीपुरम, अयोध्या और पटना का नाम शामिल है. इन स्थानों पर चित्रगुप्त के प्राचीन आराधना स्थल विराजमान हैं. इसके अलावा खजुराहो, प्रयागराज, हैदराबाद, वाराणसी, भोपाल, रीवा, भरमौर, नई दिल्ली, मैहर, गुना, गया, बक्सर, भोपाल, कानपुर, जबलपुर, ग्वालियर, शिवपुरी, जगन्नाथपुरी, गोरखपुर आदि नगरों में भी चित्रगुप्त मंदिर स्थापित हैं. भगवान चित्रगुप्त मुक्ति, भक्ति, मोक्ष व यश के चतुर्मणि हैं, जिनकी आराधना कभी निष्फल नहीं जाती.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: October 29, 2019, 2:18 PM IST
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