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Dattatreya Jayanti 2021: जानें कैसे हुआ ​ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अंश भगवान दत्तात्रेय का जन्म?

Dattatreya Jayanti 2021: जानें कैसे हुआ ​ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अंश भगवान दत्तात्रेय का जन्म?

ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी के अंश से जन्मे भगवान दत्तात्रेय

ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी के अंश से जन्मे भगवान दत्तात्रेय

Dattatreya Jayanti 2021: पौराणिक कथाओं के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि (Margashirsha Purnima) को भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ था. इस वजह से हर वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है. भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा ( Lord Brahma), विष्णु (Lord Vishnu) और शिव जी (Lord Shiva) के संयुक्त अंश से मिलकर उत्पन्न हुए थे.

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    Dattatreya Jayanti 2021: पौराणिक कथाओं के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि (Margashirsha Purnima) को भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ था. इस वजह से हर वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है. भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा ( Lord Brahma), विष्णु (Lord Vishnu) और शिव जी (Lord Shiva) के संयुक्त अंश से मिलकर उत्पन्न हुए थे. इनके तीन सिर और छह हाथ हैं. इनमें ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों की ही शक्तियां और गुण समाहित है. आइए जानते हैं भगवान दत्तात्रेय की जन्म कथा के बारे में.

    भगवान दत्तात्रेय का जन्म
    पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार नारद जी माता पार्वती के पास जाकर देवी अनुसूया के पतिव्रता धर्म का गुणगान करने लगे. वहां मौजूद तीनों देवियों को इस बात से जलन होने लगी. नारद जी के विदा होने के बाद वे तीनों देवियां अत्रि ऋषि की पत्नी देवी अनुसूया के पितव्रता धर्म को तोड़ने को लेकर चर्चा करने लगीं.

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    परिणामस्वरुप तीनों देवियों ने अपने पतियों से देवी अनुसूया का पतिव्रता धर्म तोड़ने के लिए कहा. विवश होने पर त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और शिव भिक्षुक रुप में देवी अनुसूया के आश्रम पहुंचे. देवी अनुसूया भिक्षा लेकर आईं, लेकिन त्रिदेव ने लेने से इनकार दिया और भोजन करने की इच्छा जताई. देवी अनुसूया मान गईं, भोजन बनाकर खाने के लिए बुलाया. त्रिदेव आसन पर बैठ गए और उन्होंने देवी अनुसूया को नग्न होकर भोजन परोसने को कहा.

    देवी अनुसूया पहले नाराज हुईं, लेकिन बाद में अपने तपोबल से त्रिदेव को पहचान लिया. फिर त्रिदेव को बाल स्वरुप में कर दिया. फिर उन्होंने तीनों को भोजन कराया. फिर तीनों को सुला दिया. मां की तरह उनका लालन-पालन करने लगीं. कुछ दिन बीतने पर तीनों देवियों को चिंता सताने लगी. त्रिदेव वापस नहीं आए. फिर वे तीनों देवी अनुसूया के पास गईं और अपनी गलती के लिए क्षमा मांगा.

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    तीन देवियों ने त्रिदेव को वापस लौटाने को कहा. देवी अनुसूया ने इंकार कर दिया. तब तीनों देवियों ने ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी के अंश से दत्तात्रेय को उत्पन्न किया और उनको पुत्र के रूप में देवी अनुसूया को सौंप दिया. दत्तात्रेय को पुत्र स्वरूप में पाकर देवी अनुसूया ने अपने तपोबल से त्रिदेव को उनके मूल स्वरूप में कर दिया. इस प्रकार से भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ.

    (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

    Tags: Dharma Aastha, Lord Shiva, Lord vishnu

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