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Dhanteras 2019: धनतेरस पर इस शुभ मुहूर्त पर करें खरीददारी, ये है पूजा विधि

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Updated: October 25, 2019, 7:58 PM IST
Dhanteras 2019: धनतेरस पर इस शुभ मुहूर्त पर करें खरीददारी, ये है पूजा विधि
धनतेरस के दिन भगवान धन्‍वंतरि, मां लक्ष्‍मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा का विधान है.

धनतेरत पर मां लक्ष्‍मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्‍वंतरि की पूजा का विधान है. इस दिन सोने-चांदी के आभूषण और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है.

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  • Last Updated: October 25, 2019, 7:58 PM IST
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धनतेरस (Dhanteras) दिवाली से पहले मनाया जाता है. इस बार धनतेरस 25 अक्‍टूबर यानी आज मनाया जा रहा है. मान्‍यता है कि क्षीर सागर के मंथन के दौरान धनतेरस के दिन ही आयुर्वेद के देवता भगवान धन्‍वंतरि का जन्‍म हुआ था. इस दिन मां लक्ष्‍मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्‍वंतरि की पूजा का विधान है. इसके अलावा धनतेरस के दिन मृत्‍यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है. इस दिन सोने-चांदी के आभूषण और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. धनतेरस दीपावली पर्व की शुरुआत का प्रतीक भी है. हिन्‍दू कैलेंडर के मुताबिक कार्तिक मास की तेरस यानी कि 13वें दिन धनतेरस मनाया जाता है.

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धनतेरस की तिथि और शुभ मुहूर्त
धनतेरस की तिथि: 25 अक्‍टूबर 2019

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 25 अक्‍टूबर 2019 को शाम 07 बजकर 08 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्‍त: 26 अक्‍टूबर 2019 को दोपहर 03 बजकर 36 मिनट
धनतेरस पूजा मुहूर्त: 25 अक्‍टूबर 2019 को शाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 08 बजकर 13 मिनट तक
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अवधि: 01 घंटे 05 मिनट

धनतेरस की पूजा शाम 7:08 बजे से शाम 8:22 बजे तक चलेगी. पूजा की पूरी अवधि लगभग 1 घंटा और 14 मिनट होगी. आज के दिन न सिर्फ खरीदारी को शुभ माना गया है बल्कि घर में दीपक भी जलाया जाता है. आज मां लक्ष्मी के साथ भगवान धन्वंतरि की भी पूजा की जाती है. आज शाम 5.36 बजे से रात 8.02 बजे तक धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त है. आज के दिन आप बर्तन, जेवर, इलेक्ट्रिक सामान, अलमारी और भगवान लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति भी खरीद सकते हैं.

धनतेरस कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी में शुभ लग्न सुबह 7:08 मिनट से शुरू होकर 26 अक्टूबर को दोपहर में 3:46 बजे तक है. इस कारण इस बीच की गई खरीदारी शुभ और फलदायी होगी. इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिये श्रेष्ठ मुहूर्त प्रदोष काल एवं वृष लग्न शाम 5:39 बजे से 8:47 बजे तक रहेगा.सुबह 09 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर पूरा दिन पूरी रात पार करके अगली सुबह 06 बजकर 03 मिनट तक इंद्र योग रहेगा. इस दौरान पूजा करना बेहद लाभकारी है.

धनतेरस की पूजा विधि

धनतेरस के दिन भगवान धन्‍वंतरि, मां लक्ष्‍मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा का विधान है. धनतेरस के दिन आरोग्‍य के देवता और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्‍वंतरि की पूजा की जाती है. मान्‍यता है कि इस दिन धन्‍वंतरि की पूजा करने से आरोग्‍य और दीर्घायु प्राप्‍त होती है. इस दिन भगवान धन्‍वंतरि की प्रतिमा को धूप और दीपक दिखाएं. साथ ही फूल अर्पित कर सच्‍चे मन से पूजा करें.

धनतेरस के दिन मृत्‍यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है. इस दिन संध्‍या के समय घर के मुख्‍य दरवाजे के दोनों ओर अनाज के ढेर पर मिट्टी का बड़ा दीपक रखकर उसे जलाएं. दीपक का मुंह दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए. दीपक जलाते समय इस मंत्र का जाप करें.

मृत्‍युना दंडपाशाभ्‍यां कालेन श्‍याम्‍या सह|
त्रयोदश्‍यां दीप दानात सूर्यज प्रीयतां मम ||

धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है. मान्‍यता है कि उनकी पूजा करने से व्‍यक्ति को जीवन के हर भौतिक सुख की प्राप्‍ति होती है. इस दिन भगवान कुबेर की प्रतिमा या फोटो धूप-दीपक दिखाकर पुष्‍प अर्पित करें. फिर दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर सच्‍चे मन से इस मंत्र का उच्‍चारण करें.

ॐ श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्‍लीं श्रीं क्‍लीं वित्तेश्वराय नम:

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धनतेरस के दिन मां लक्ष्‍मी की पूजा का विधान है. इस दिन मां लक्ष्‍मी के छोटे-छोटे पद चिन्‍हों को पूरे घर में स्‍थापित करना शुभ माना जाता है. धनतेरस के दिन प्रदोष काल में मां लक्ष्‍मी की पूजा करनी चाहिए. इस दिन मां लक्ष्‍मी के साथ महालक्ष्‍मी यंत्र की पूजा भी की जाती है. इस मंत्र का उच्चारण कर पूजा करें.

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलिए प्रसीद प्रसीद |
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मिये नम: ||
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: October 25, 2019, 9:47 AM IST
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