Dhanteras 2020: धनतेरस के दिन मनाई जाएगी हनुमान जयंती, इस समय करें खरीददारी और पढ़ें हनुमान चालीसा

हनुमान जी की कृपा से धन, विजय और आरोग्य की प्राप्ति होती है.
हनुमान जी की कृपा से धन, विजय और आरोग्य की प्राप्ति होती है.

धनतेरस (Dhanteras 2020) के दिन लोग सोना-चांदी (Gold and Silver) की खरीदारी करते हैं, ताकि उनके घर में सुख और समृद्धि बनी रहे. इसी दिन कलियुग के एक मात्र जाग्रत देव हनुमान जी (Lord Hanuman) की जयंती भी मनाई जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 12, 2020, 11:26 AM IST
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कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस (Dhanteras 2020) मनाया जाता है. धनतेरस दिवाली (Diwali 2020) से पहले आता है. इस साल धनतेरस 13 नवंबर (शुक्रवार) को मनाया जाएगा. हालांकि कई जगहों पर लोग आज भी धनतेरस मना रहे हैं. धनतेरस पर खरीदारी का विशेष महत्व है. धनतेरस के दिन लोग सोना-चांदी की खरीदारी करते हैं, ताकि उनके घर में सुख और समृद्धि बनी रहे. इसी दिन कलियुग के एक मात्र जाग्रत देव हनुमान जी की जयंती भी मनाई जाएगी. कार्तिक मास की त्रयोदशी 12 नवंबर को रात्रि 9:30 बजे से शुरू होगी और 13 नवंबर को शाम 6 बजे तक रहेगी. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी हनुमान जी का जन्म मेष लग्न स्वाति नक्षत्र में मंगलवार को हुआ था जिसे श्री हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है.

इस वर्ष हनुमान जयंती 13 नवंबर को मनाई जाएगी. इसी दिन धनतेरस होगा जिसमें धातु खरीदकर समृद्धि की कामना की जाती है. धनतेरस पर भगवान धनवंतरि की पूजा होती है. बजरंगबली को ग्राम देवता के रूप में भी पूजा जाता है. हालांकि कोरोना की वजह से हनुमान जयंती पर किसी तरह का कोई आयोजन नहीं किया जाएगा. हनुमान मंदिरों में सुबह विशेष आरती के साथ पूजन किया जाएगा. कहते हैं कि इस दिन हनुमान जी का नाम लेने से ही सारे दुख दूर हो जाते हैं. इस दिन पंचमुखी हनुमान की भी पूजा की जाती है.

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पूरे दिन खरीदारी का मुहूर्त
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 13 नवंबर को पूरे दिन खरीदारी का मुहूर्त है. सुबह 7:46 से सुबह 10:29 और सुबह 11:50 से दोपहर 1:12 तक, दोपहर 3:55 से शाम 5:16 तक और रात 8:34 से खरीदारी होगी. सुबह 11:02 से दोपहर 12:12 और 5:16 से शाम 7:54 तक प्रदोषकाल में खरीदारी श्रेयस्कर होती है. वृषभ लग्न शाम 5:21 बजे से शाम 7:17 बजे तक खरीदारी की जाती है.

पढ़ें हनुमान चालीसा

दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

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दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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