Diwali 2019: दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ क्यों होती है भगवान गणेश की पूजा?

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ही समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का आगमन हुआ था.

भगवान गणेश बुद्धि के प्रतीक हैं और मां लक्ष्मी धन-समृद्धि की. दिवाली पर घरों में इन मूर्तियों को स्थापित कर पूजन करने से धन और सद्बुद्धि दोनों प्राप्त होती है.

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    दिवाली रोशनी और खुशियों का त्योहार है. सभी लोग बड़ी ही बेसब्री से इस पर्व का इंतजार करते हैं. दिवाली पर पूरे घर की साफ सफाई कर इसे सजाया जाता है. साथ ही पूरे घर को दीयों की रोशनी से भर दिया जाता है. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि धन की देवी मां लक्ष्मी इस दिन घर में प्रवेश करती हैं. इस दिन धन-संपदा और शांति के लिए ही लक्ष्मी मां की पूजा-अर्चना की जाती है.

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    इस दिन मां लक्ष्मी का जन्म दिवस होता है

    धार्मिक कथाओं के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ही समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का आगमन हुआ था. एक अन्य मान्यता के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी का जन्म दिवस होता है. कुछ स्थानों पर इस दिन को देवी लक्ष्मी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है. जीविद्यार्णव तंत्र में कालरात्रि को शक्ति रात्रि की संज्ञा दी गई है. कालरात्रि को शत्रु विनाशक माना गया है साथ ही शुभत्व का प्रतीक, सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला भी माना गया है.

    भगवान गणेश बुद्धि के प्रतीक हैं

    वहीं भगवान गणेश बुद्धि के प्रतीक हैं और मां लक्ष्मी धन-समृद्धि की. दिवाली पर घरों में इन मूर्तियों को स्थापित कर पूजन करने से धन और सद्बुद्धि दोनों प्राप्त होती है. शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी जी को धन का प्रतीक माना गया है, जिसकी वजह से लक्ष्मी जी को इसका अभिमान हो जाता है. विष्णु जी इस अभिमान को खत्म करना चाहते थे इसलिए उन्होंने लक्ष्मी जी से कहा कि स्त्री तब तक पूर्ण नहीं होती है, जब तक वह मां न बन जाए. लक्ष्मी जी का कोई पुत्र नहीं था, इसलिए यह सुन के वह बहुत निराश हो गईं. तब वह देवी
    पार्वती के पास पहुंचीं.

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    सुख-समृद्धि के लिए पहले गणेश जी की होती है पूजा

    मां पार्वती के दो पुत्र थे इसलिए लक्ष्मी जी ने उनसे एक पुत्र को गोद लेने की मांग की. मां पार्वती जानती थीं कि लक्ष्मी जी एक स्थान पर लंबे समय नहीं रहती हैं. इसलिए वह बच्चे की देखभाल नहीं कर पाएंगी, लेकिन उनके दर्द को समझते हुए उन्होंने अपने पुत्र गणेश को उन्हें सौंप दिया. इससे लक्ष्मी माता बहुत प्रसन्न हुईं. उन्होंने कहा कि सुख-समृद्धि के लिए पहले गणेश जी की पूजा करनी पड़ेगी तभी मेरी पूजा संपन्न होगी. यही कारण है कि दिवाली के दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है.

    Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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