Diwali 2020: दिवाली और लक्ष्मी पूजा का क्या है कनेक्शन, जानें पूरी बात इतिहास

दिवाली का त्योहार क्यों मनाया जाता है जानें इतिहास
दिवाली का त्योहार क्यों मनाया जाता है जानें इतिहास

Diwali 2020: दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि दिवाली के दिन माता लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुईं थी. यही कारण है कि इस दिन लक्ष्मी पूजन होता है. इस दिन मां लक्ष्मी से घर में अन्न-धन का भण्डार भरे रखने की कामना की जाती है और उनके साथ भगवान गणेश की पूजा भी होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 9:58 AM IST
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Diwali 2020: दीयों का त्योहार (Diwali, Festival Of Diya) दिवाली हिन्दू धर्म का मुख्य त्योहार है. यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में सम्पूर्ण भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इसे दीपावली भी कहते हैं जो संस्कृत का शब्द है और इस मतलब होता है 'रोशनी की एक कतार'. सदियों से दिवाली का त्योहार मनाया जाता है और केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में इसे धूमधाम से मनाया जाता है. आइए जानते हैं कि क्यों मनाया जाता है दिवाली का त्योहार, क्या है इस त्योहार का इतिहास और इस त्योहार से जुड़ी दिलचस्प मान्यताएं...

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दिवाली का त्योहार क्यों मनाया जाता है
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम द्वारा रावण (दशहरा) को मारने और सीता को लंका में कैद से छुड़ाने के 20 दिन बाद दिवाली मनाई गई थी. यह उत्सव 14 साल वनवास के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने का प्रतीक है. भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के स्वागत के लिए पूरा अयोध्या शहर सजाया गया था. लोगों ने अपने राजा का स्वागत करने के लिए शहर को दीयों (मिट्टी के दीयों) से सजाया. तब से दिवाली के दिन मिट्टी के दीयों से सजावट की जाती है और इस त्योहार को मनाया जाता है.
लक्ष्मी पूजन की मान्यता


दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि दिवाली के दिन माता लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुईं थी. यही कारण है कि इस दिन लक्ष्मी पूजन होता है. इस दिन मां लक्ष्मी से घर में अन्न-धन का भण्डार भरे रखने की कामना की जाती है और उनके साथ भगवान गणेश की पूजा भी होती है.

दिवाली कैसे मनाते हैं

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जहां स्वच्छता हो वहीं पर ईश्वर का वास माना जाता है. दिवाली पर साफ-सफाई का ख़ास महत्व है क्योंकि मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और लोगों के घरों में जाती हैं. इस भव्य उत्सव की तैयारी घर में साफ़-सफाई से शुरू होती है और घरों के अलावा दफ्तरों और दुकानों तक को सजाया जाता है. त्योहार से दो दिन पहले धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है. दिवाली के दिन मिठाई, पकवान आदि तैयार किये जाते हैं और एक-दूसरे में बांटे भी जाते हैं. भाग्य और समृद्धि की कामना के साथ मां लक्ष्मी का साथ हमेशा बना रहे इसके लिए पूजा की जाती है. पूरे घर को रौशन किया जाता है. दिवाली की रौशनी में पारंपरिक तरीका मिट्टी के दीये जलाना ही माना जाता है. इसके अलावा भी कई तरह के इलेक्ट्रिकल उपकरणों से आजकल रौशनी की जाने लगी है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें).
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