• Home
  • »
  • News
  • »
  • dharm
  • »
  • DO YOU KNOW WHO WAS THE SON OF HANUMAN JI KNOW ITS STORY PUR

क्या आपको पता है कौन थे हनुमान जी के पुत्र, जानें इसकी पौराणिक कथा

मंगलवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.

कहते हैं हनुमान जी ने (Lord Hanuman) आजीवन विवाह नहीं किया था लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका एक पुत्र था.

  • Share this:
    Lord Hanuman: हनुमान जी (Hanuman Ji) अपने भक्तों पर आने वाले तमाम तरह के कष्टों और परेशानियों को दूर करते हैं. ऐसी मान्यता है कि भगवान हनुमान बहुत जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं. उनकी पूजा पाठ में ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं होती. मंगलवार (Tuesday) को उनकी पूजा के बाद अमृतवाणी और श्री हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने से बजरंगबली खुश होते हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. मंगलवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. पवन पुत्र को प्रसन्न करने के लिए कोई हनुमान चालीसा का पाठ करता है तो कोई सुंदर कांड का पाठ. वहीं कोई मंत्रों का जाप करता है. श्रीराम के अनन्य भक्त, अनंत ताकतवर, समुद्र को एक छलांग मे लांघ जाने वाले, सोने की लंका को अपनी पूंछ की आग से जला देने वाले बजरंगबली, अपने स्वामी भगवान राम को अत्यंत प्रिय थे. कहते हैं हनुमान जी ने आजीवन विवाह नहीं किया था लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका एक पुत्र था. आखिर यह कैसे संभव है और क्या है इसकी कथा, आइए जानते है.

    कथानुसार रावण को युद्ध में अपनी हार दिखने लगी थी और वह परेशान हो गया था. रावण का महा प्रतापी पुत्र मेघनाथ और अत्यंत बलशाली भाई कुंभकर्ण युद्ध भूमि में मारे जा चुके थे. ऐसी स्थिति में रावण ने, पाताल लोक के स्वामी अहिरावण को मजबूर किया कि वह श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण करे. अहिरावण अत्यंत मायावी राक्षस राजा था. वह हनुमान का रूप धारण करके, अपनी माया से, श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण करके पताल लोक ले जाने में सफल भी हो गया. सुबह जब सब ने देखा, तो श्रीराम के शिविर में हाहाकार मच गया और उनकी खोज होने लगी.

    इसे भी पढ़ेंः मंगलवार को इस विधि से करें हनुमान जी की पूजा, सारे कष्‍ट होंगे दूर

    बजरंगबली श्रीराम और लक्ष्मण को ढूंढते हुए पताल में जाने लगे. पाताल लोक के सात द्वार थे, और हर एक द्वार पर एक पहरेदार था लेकिन सभी पहरेदारों को हनुमान जी ने अपने बल से परास्त कर दिया, लेकिन अंतिम द्वार पर उन्हीं के समान बलशाली, स्वयं एक वानर पहरा दे रहा था. अपने समान रूप को देखकर हनुमान जी को आश्चर्य हुआ और उस वानर से हनुमान जी ने परिचय पूछा, तो उसने अपना नाम मकरध्वज बताया और अपने पिता का नाम हनुमान बताया.

    जैसे ही मकरध्वज ने अपने पिता का नाम हनुमान बताया, तो बजरंगबली अत्यंत क्रोधित हो गए और बोले कि यह असंभव है, क्योंकि मैं आजीवन ब्रह्मचारी रहा हूं. तुम ऐसा झूठ क्यों बोल रहे हो? फिर मकरध्वज ने बताया कि जब हनुमान जी लंका जला कर समुद्र में आग बुझाने को कूदे थे, तब उनके शरीर का तापमान अत्यंत बढ़ा हुआ था. ऐसे में जब वह सागर के ऊपर थे, तब उनके शरीर के पसीने की एक बूंद सागर में गिर गई थी, जिसे एक मकर ने पी लिया था, और उसी पसीने की बूंद से वह गर्भावस्था को प्राप्त हो गई. आपको बता दें कि वह मकर पूर्व जन्म में कोई अप्सरा थी, जो श्राप के कारण मकर बन गई थी. बाद में उसी मकर को अहिरावण के मछुआरों ने पकड़ लिया और मार दिया, और उसी के गर्भ से मकरध्वज का जन्म हुआ.

    इसे भी पढ़ेंः मंगलवार को हनुमान जी को क्यों चढ़ाते हैं सिंदूर का चोला, जानें क्या है कारण

    बाद में वह अप्सरा भी श्राप से मुक्त हो गई. यह कथा जानकर हनुमान जी ने मकरध्वज को अपने गले से लगा लिया. हालांकि अपने पिता के रूप में हनुमान जी को पहचानने के बाद भी मकरध्वज हनुमान जी को अंदर जाने देने को तैयार नहीं हुआ. अपने पुत्र को स्वामी भक्ति पर अटल देखकर हनुमान जी उससे और प्रसन्न हुए और दोनों में भयंकर युद्ध हुआ, लेकिन अंत में हनुमान जी ने अपनी पूंछ से उसे बांधकर दरवाजे से हटा दिया, और हनुमान जी ने राम और लक्ष्मण को मुक्त कराने में सफलता प्राप्त कर ली. बाद में मकरध्वज को ही पताल का नया राजा, स्वयं श्रीराम ने घोषित किया.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
    Published by:Purnima Acharya
    First published: