Pitru Paksha 2020: पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये गलतियां, पितरों को हो सकती है नाराजगी

Pitru Paksha 2020: पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये गलतियां, पितरों को हो सकती है नाराजगी
भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक के पूरे समय में विधि पूर्वक श्राद्ध कर्म करने का विधान है.

अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए और पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2020) के इन 15 दिनों में भूल कर भी कुछ गलतियां नहीं करनी चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 29, 2020, 8:35 AM IST
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पितृ पक्ष 2020 (Pitru Paksha 2020): भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 1 और 2 सितंबर को है. इस दिन अगस्त्य मुनि का तर्पण (Tarpan) करने का शास्त्रीय विधान है. इस वर्ष इस साल पितृ पक्ष 1 सितंबर 2020 से शुरू होकर 17 सिंतबर तक चलेगा. पितृ पक्ष एक महत्वपूर्ण पक्ष है. भारतीय धर्मशास्त्र और कर्मकांड के अनुसार पितर देव (God) स्वरूप होते हैं. इस पक्ष में पितरों के निमित्त दान, तर्पण, श्राद्ध के रूप में श्रद्धापूर्वक जरूर करना चाहिए. पितृपक्ष में किया गया श्राद्ध-कर्म सांसारिक जीवन को सुखमय बनाते हुए वंश की वृद्धि भी करता है.

अंत्येष्टि संस्कार को व्यक्ति के जीवन चक्र का अंतिम संस्कार माना जाता है. लेकिन अंत्येष्टि के पश्चात भी कुछ ऐसे कर्म होते हैं जिन्हें मृतक के संबंधी मिलकर निभाते हैं जिसमें पुत्र या संतान की प्रमुख भूमिका होती है. अंत्येष्टि के पश्चात आता है श्राद्ध. ये संस्कार संतान का मुख्य कर्त्तव्य माना जाता है और कहा जाता है कि श्राद्ध संस्कार को बखूबी निभाने से पितर अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं क्योंकि इससे उनके मुक्ति का द्वार खुल जाता है.

कब होता है श्राद्ध कर्म
वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को श्राद्ध कर्म किया जा सकता है. लेकिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक के पूरे समय में विधि पूर्वक श्राद्ध कर्म करने का विधान है. इस पूरे पक्ष को पितृ पक्ष भी कहा जाता है. आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या 15 दिन का समय पितृ पक्ष के नाम से विख्यात है. इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों या पूर्वजों को जल तर्पण करते हैं और उनकी मृत्यु की तिथि के अनुसार उनका श्राद्ध करते हैं.
क्या है पितृ श्राद्ध


माता, पिता या किसी अन्य परिवारीजन की मृत्योपरांत उनकी तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले कर्म को पितृ श्राद्ध कहते हैं. मान्यता यह है कि पितृ पक्ष के 15 दिनों में पितर जो इस दुनिया में मौजूद नहीं हैं वो जन कल्याण के लिए धरती में विराजमान होते हैं और हम उन्हें अर्पित भोजन और जल का भोग लगाते हैं. ऐसे में पितरों को प्रसन्न करना जरूरी होता है क्योंकि उन्हीं के आशीर्वाद से उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है. लेकिन कई बार जाने-अनजाने में हमसे कुछ ऐसी गलतियां भी हो जाती हैं जिनसे पितर नाराज हो जाते हैं. यदि आप भी पितरों को प्रसन्न करना चाहते हैं तो आपको भूलकर भी ये गलतियां नहीं करनी चाहिए.

पितृ पक्ष में न करें ये गलतियां
अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए और पितृ पक्ष के इन 15 दिनों में भूल कर भी ये गलतियां नहीं करनी चाहिए.

नया सामान न खरीदें
पितृ पक्ष में कोई भी नया सामान नहीं खरीदना चाहिए. ऐसा माना जाता है ये समय अपने पूर्वजों को याद करने का होता है इसलिए ये समय उनकी यादों में शोक दिखाने के लिए होता है. ऐसे में नई वस्तुओं की खरीदारी पितरों को नाराज कर सकती है.

बाल न कटवाएं
जो लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण करते हों उन्हें पितृ पक्ष में 15 दिन तक अपने बाल नहीं कटवाने चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से पूर्वज नाराज हो सकते हैं.

भिखारी को भिक्षा देने से इनकार
आमतौर पर मान्यता है कि अतिथि देव स्वरूप होता है लेकिन मुख्य रूप से पितृ पक्ष में किसी भी भिखारी को भीख देने से इनकार नहीं करना चाहिए. क्योंकि हो सकता है कि भिखारी के रूप में आपके पूर्वज हों और भिक्षा देने से इनकार करना उनका अपमान करना हो सकता है. इन दिनों किया गया दान पूर्वजों को तृप्ति देता है.

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लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल है वर्जित
पितृ पक्ष के दौरान पीतल, फूल या तांबे के बर्तनों में ही पितरों को जल दिया जाता है. इसलिए हमेशा तर्पण के लिए इन्हीं बर्तनों का इस्तेमाल करें. पितरों की पूजा के लिए लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल पूरी तरह से वर्जित माना जाता है. ऐसा करने से पितर रुष्ट हो जाते हैं.

किसी दूसरे के घर में भोजन से बचें
मान्यतानुसार जो लोग पितरों को तर्पण करते हैं उन्हें पितृ पक्ष के 15 दिनों तक किसी और के घर में भोजन नहीं करना चाहिए. किसी और का अन्न ग्रहण करने से भी पितर नाराज हो सकते हैं. पितरों को प्रसन्न करने के लिए सबसे अच्छा समय पितृ पक्ष ही होता है इसलिए उपर्युक्त बातों का ध्यान रखकर पितरों का पूजन करना सभी के लिए लाभप्रद हो सकता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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