Durga Puja 2020: जानिए देवी दुर्गा के हथियारों के बारे में, क्‍या है इनका महत्व

देवी की महाशक्तियों को उनके दस हाथों के साथ विभिन्न महत्व के विभिन्न हथियार पकड़े हुए दर्शाया गया है.

Durga Puja 2020: देवी दुर्गा (Devi Durga) को सबसे शक्तिशाली देवी के रूप में जाना जाता है. उन्हें पृथ्वी पर सभी राक्षसों को खत्म करने के लिए कई देवताओं की शक्तियां (Powers of Gods) एक साथ मिली हैं. देवी की दस भुजाएं सभी दिशाओं से अपने भक्तों की सुरक्षा की प्रतीक हैं.

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सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक दुर्गा पूजा का उत्सव (Durga Puja Festival) देश के कोने-कोने में मनाया जाता है. कोविड-19 (Covid-19) के कारण देवी दुर्गा (Devi Durga) के सभी भक्त एहतियात बरतते हुए त्योहार की तैयारी में लगे हुए हैं. दुर्गा पूजा का त्योहार देश के अलग-अलग हिस्सों में 6 से 10 दिनों तक अलग-अलग दिनों में मनाया जाता है. यह त्योहार उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में नवरात्रि (Navratri) के रूप में मनाया जाता है. यह देश भर में विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में भव्यता के साथ मनाया जाता है. देवी दुर्गा को सबसे शक्तिशाली देवी के रूप में जाना जाता है, क्योंकि उन्हें पृथ्वी पर सभी राक्षसों को खत्म करने के लिए कई देवताओं की शक्तियां एक साथ मिली हैं. देवी की दस भुजाएं सभी दिशाओं से अपने भक्तों की सुरक्षा की प्रतीक हैं. वास्तव में देवी की महाशक्तियों को उनके दस हाथों के साथ विभिन्न महत्व के विभिन्न हथियार पकड़े हुए दर्शाया गया है. हथियारों के प्रतीक और अर्थ इस प्रकार हैं:

त्रिशूल (Trishul)
भगवान शिव द्वारा भेंट किए गए त्रिशूल में तीन तीक्ष्ण धार हैं, जो तीन गुणों की प्रतीक हैं- तन्मास (शांति, निष्क्रियता और सुस्त प्रवृत्ति), सत्व (मोक्ष, सकारात्मकता और पवित्रता) और राजस (शांति, अति सक्रियता और अरमान).

शंख (Conch)
इसे भगवान वरुण ने उपहार में दिया हैं. शंख से निकलने वाली ध्वनि 'ओम' सबसे शुद्ध और सबसे पवित्र ध्वनि की प्रतीक है, जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना हुई है.

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सुदर्शन चक्र (Sudarshan Chakra)
चक्र, भगवान विष्णु का एक उपहार है, जो इस बात का प्रतीक है कि दुनिया देवी दुर्गा द्वारा नियंत्रित है और जो सृष्टि का केंद्र है ब्रह्मांड उसके चारों ओर घूमता है. यह धार्मिकता या धर्म का भी प्रतीक है, क्योंकि यह देवी की तर्जनी पर घूमता है. इस हथियार का उपयोग सभी बुराइयों को नष्ट करने और धर्मियों की रक्षा करने के लिए किया जाता है.

कमल (Lotus)
कमल भगवान ब्रह्मा का प्रतीक है, जो ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है. आधा खिलने वाला कमल भी अंधेरे काल में भी मन में आध्यात्मिक चेतना के जागरण का प्रतीक है, क्योंकि कीचड़ में भी कमल उगता है.

धनुष और बाण (Bow and Arrow)
धनुष और बाण भगवान वायु और भगवान सूर्य द्वारा दिए गए हैं, जो ऊर्जा के प्रतीक हैं. धनुष संभावित ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि तीर गतिज ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है. यह इस बात का भी प्रतीक है कि देवी दुर्गा ही ब्रह्मांड में ऊर्जा के सभी स्रोत को नियंत्रित करती हैं.

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वज्र (Thunderbolt)
भगवान इंद्र का उपहार वज्र, आत्मा की दृढ़ता, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक है. देवी दुर्गा अपने भक्त को अदम्य आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति के साथ सशक्त बनाती हैं.

तलवार (Sword)
भगवान गणेश द्वारा दी गयी तलवार ज्ञान और बुद्धि की प्रतीक है. यह बुद्धि की तीक्ष्णता का प्रतिनिधित्व करती है और तलवार की चमक ज्ञान का प्रतिनिधित्व करती है.

भाला (Spear)
भाला शुभता का प्रतीक है, जो भगवान अग्नि द्वारा उपहार में दिया गया हैं. यह उग्र शक्ति का भी प्रतिनिधित्व करता है. यह उस गुण का प्रतीक है, जो गलत और क्या सही है और उसके अनुसार कार्य करने के बीच का अंतर जानता है.

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कुल्हाड़ी (Axe)
देवी दुर्गा को भगवान विश्वकर्मा से एक कुल्हाड़ी और एक कवच प्राप्त हुआ, जो बुराई से लड़ने पर किसी भी परिणाम का भय नहीं होने का संकेत देता है.

सांप (Snake)
भगवान शिव का सांप चेतना और ऊर्जा का प्रतीक है. यह नई चीजों का अनुभव करने के आग्रह के साथ चेतना की निचली अवस्था से उच्च अवस्था में परिवर्तन का भी प्रतिनिधित्व करता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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