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मुंगेर: एक साथ 2500 किलो की प्रतिमाएं, विसर्जन में 100 भक्तों को जुटना पड़ा, जानिए खासियत

Munger news: बिहार के मुंगेर-बांका ज़िले के सीमावर्ती क्षेत्र हरिवंशपुर गांव में श्री कृष्ण काली भगवती की पूजा पूरे साल ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट- सिद्धांत राज

    मुंगेर. दुर्गा पूजा में प्रतिमाएं तो आपने बहुत देखी होंगी, लेकिन बिहार के मुंगेर की यह प्रतिमा और इसका विर्सजन काफी खास है. सभी 15 प्रतिमाओं का वजन 2.5 टन यानी 2500 किलो का था. बुधवार को जब इसका विसर्जन किया गया तो देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. इसमें एक साथ 10 देवी और देवताओं की प्रतिमा के साथ उनकी सवारी और असुर थे.

    प्रतिमा बनाने वाले सौरव पंडित ने कहा कि देवी, देवता, उनकी सवारी, असुर और जिस मेढ़ पर प्रतिमा बैठती है, उन सभी का कुल वजन लगभग 2500 किलो है. यह मंदिर लगभग 419 वर्ष पुराना है. नवरात्र में इस देवी की दर्शन प्रतिमा को मां श्री कृष्ण काली भगवती कहते हैं. यहां हर वर्ष दशहरा में हजारों छागर की बलि भी दी जाती है.

    इस मंदिर में विराजते हैं 10 देवी-देवता और एक असुर

    बिहार के मुंगेर-बांका ज़िले के सीमावर्ती क्षेत्र हरिवंशपुर गांव में श्री कृष्ण काली भगवती की पूजा पूरे साल होती है. लेकिन खासकर नवरात्र में माता की प्रतिमा बनाई जाती है. इसे अंतिम रूप सप्तमी के शाम देकर भक्तों के लिए माता के दरबार के पट खोल दिए जाते हैं. यहां की खास बात यह है कि श्री कृष्ण काली भगवती की दर्शन प्रतिमा में 10 देवी-देवता और एक असुर रहते हैं. जिसे बंगला पद्धति से विधिवत विजयादशमी की देर शाम विसर्जित कर दिया जाता है.

    मां की प्रतिमा में रहते हैं ये देवता और देवी

    मां कृष्ण काली भगवती को तेलडीहा महारानी भी कहते हैं. यहां पर सबसे खास बात यह है कि एक ही मेढ़ पर मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ मां काली, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान कृष्ण, भगवान गणेश, भगवान कार्तिके, भगवान महादेव की दो प्रतिमा, उनके साथ उसके दो दूत, एक भंगघोटन बाबा और जोगो बाबा रहते हैं. साथ ही एक दुर्गा मां की सवारी, शेर और कछुआ और मेढ़ की सुरक्षा के लिए ऊपर पर दो मगरमच्छ भी रहते हैं.

    माता कछुआ पर क्यों हैं सवार?

    मंदिर के पुजारी तपन बाबा द्वारा बताया गया कि इस प्रतिमा में मां दुर्गा के 1 पैर शेर पर और एक पैर भगवान विष्णु के अवतार कछुआ पर है. साथ ही महादेव के दो दूत में भंगघोटन बाबा का काम है. महादेव को भांग पीस कर पिलाना और दूसरे जोगो बाबा महादेव के अंगरक्षक के रूप में तैनात हैं. आगे उन्होंने आगे बताया कि जब माता दुर्गा असुर महिषासुर का वध कर रही थी तो वह काफी क्रोध और विकराल रूप में थी. तभी वध करते वक्त उनके पैर जहां पर रहे थे वह धंस रहा था. तभी सृष्टि की तबाही को रोकने के लिए भगवान विष्णु ने कछुआ का अवतार लेकर मां दुर्गा के पैर के नीचे चले आये. उसी वक़्त से माता दुर्गा की सवारी कछुआ को माना जाता है जिसे इस प्रतिमा में दर्शाया गया है.

    इस प्रतिमा में कुल इतना वजन

    माता कृष्ण काली भगवती की प्रतिमा बनाने वाले सौरव पंडित बताते हैं कि सभी देवी, देवता, उनकी सवारी, असुर और जिसपर मेढ़ पर प्रतिमा बैठती है उन सभी का कुल वजन लगभग 2.5 टन (2500 किलो) होता है.

    प्रतिमा विसर्जन में लगते हैं 100 भक्त

    विजयादशमी की देर शाम माता की प्रतिमा की विसर्जन के वक़्त लगभग 100 से ज्यादा श्रद्धालु ने सभी प्रतिमा को एक साथ उठा कर मंदिर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर बदुआ नदी में विसर्जित की गई.

    Tags: Bihar News, Durga Puja festival, Munger news

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