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Dussehra 2021: देश के इन 5 जगहों का दशहरा मेला दुनियाभर में है फेमस, जान लें इनकी खासियत

देश के फेमस दशहरा मेला....

देश के फेमस दशहरा मेला....

Dussehra 2021: हिन्दू पंचाग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी (Dashami) को और दिवाली से ठीक बीस दिन पहले विजयादशमी या दशहरे का त्योहार देशभर में मनाया जाता है.

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    Dussehra 2021: हिन्दू धर्म में जितने भी त्योहार मनाए जाते हैं उन सब का कोई न कोई संदेश जरूर होता है. ऐसा ही एक त्योहार है दशहरा (Dusshera) जिसका सन्देश होता है- बुराई पर अच्छाई की जीत. हिन्दू पंचाग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी (Dashami) को और दिवाली से ठीक बीस दिन पहले विजयादशमी या दशहरे का त्योहार देशभर में मनाया जाता है. इस वर्ष दशहरे का त्योहार 15 अक्टूबर (शुक्रवार) के दिन मनाया जाएगा. इसी दिन भगवान राम ने अहंकारी रावण का वध कर के माता सीता को उसके चंगुल से बचाया था. देश के कई हिस्सों में यह दिन विजयादशमी के रूप में भी मनाया जाता है. आइए आपको बताते हैं देश के ऐसे 5 दशहरा मेलों के बारे में जो दुनियाभर में मशहूर हैं.

    मदिकेरी
    कर्नाटक के मदिकेरी शहर में दशहरा पर्व 10 दिनों तक शहर के 4 बड़े अलग-अलग मंदिरों में आयोजित किया जाता है. इसकी तैयारी 3 महीने पहले से ही शुरू कर दी जाती है. दशहरे के दिन से एक विशेष उत्सव (मरियम्मा) की शुरुआत होती है. मान्यता है कि इस शहर के लोगों को एक खास तरह की बीमारी ने घेर रखा था, जिसे दूर करने के लिए मदिकेरी के राजा ने देवी मरियम्मा को प्रसन्न करने के लिए इस उत्सव की शुरुआत की थी.

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    बस्तर
    छत्तीसगढ़ में बस्तर जिले के दण्डकरण्य में भगवान राम अपने चौदह वर्ष के दौरान रहे थे. इसी जगह के जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर है, जहां पर हर वर्ष दशहरे पर वन क्षेत्र के हजारों आदिवासी आते हैं. बस्तर के लोग 600 साल से यह त्योहार मनाते आ रहे हैं. इस जगह पर रावण का दहन नहीं किया जाता. दरअसल यहां के आदिवासियों और राजाओं के बीच अच्छा मेल जोल था. राजा पुरुषोत्तम ने यहां पर रथ चलाने की प्रथा शुरू की थी. इसी कारण से यहां पर रावण दहन नहीं बल्कि दशहरे के दिन रथ चलाया जाता है.

    मैसूर
    दशहरा को कर्नाटक का प्रादेशिक त्योहार माना जाता है. मैसूर का दशहरा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. यहां पर दशहरा देखने के लिए लोग दुनियाभर से आते हैं. आपको बता दें कि यहां पर दशहरा का मेला नवरात्रि से ही प्रारंभ हो जाता है. इसमें लाखों लोग शिरकत करते हैं. मैसूर में दशहरा का सबसे पहला मेला 1610 में आयोजित किया गया था. मैसूर का नाम महिषासुर के नाम पर रखा गया था. इस दिन मैसूर महल को एक दुल्हन की तरह से सजाया जाता है. गायन वादन के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है.

    कुल्लू
    हिमाचल प्रदेश में कुल्लू के ढालपुर मैदान में मनाए जाने वाले दशहरे को भी दुनिया का प्रसिद्ध दशहरा माना जाता है. हिमाचल के कुल्लू में दशहरे को अंतरराष्ट्रीय त्योहार घोषित किया गया है. यहां पर लोग बड़ी तादाद में आते हैं. यहां दशहरे का त्योहार 17वीं शताब्दी से मनाया जा रहा है. यहां पर लोग अलग-अलग भगवानों की मूर्ति को सिर पर रखकर भगवान राम से मिलने के लिए जाते हैं. यह उत्सव यहां 7 दिन तक मनाया जाता है.

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    कोटा
    राजस्थान के कोटा शहर मे दशहरे का आयोजन 25 दिनों तक लगातार होता है. इस मेले की शुरुआत 125 वर्ष पूर्व महाराज भीमसिंह द्वितीय ने की थी. यह परंपरा आज तक निभाई जा रही है. इस दिन यहां रावण, मेघनाद और कुंभकरण का पुतला दहन किया जाता है. इसके साथ ही भजन कीर्तन और कई प्रकार की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं. इसलिए यह मेला देशभर में फेमस है.

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