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Dussehra 2022: हर साल क्यों मनाते हैं दशहरा? जानें इस त्योहार का पौराणिक महत्व

Dussehra 2022: हर साल क्यों मनाते हैं दशहरा? जानें इस त्योहार का पौराणिक महत्व

दशहरा के दिन रावण, कुंभकर्ण और इंद्रजीत के बड़े-बड़े पुतले बनाए जाते हैं.

दशहरा के दिन रावण, कुंभकर्ण और इंद्रजीत के बड़े-बड़े पुतले बनाए जाते हैं.

Dussehra 2022: दशहरा का त्योहार आश्विन शुक्ल दशमी तिथि को मनाते हैं. इस दिन शाम के समय में रावण, कुंभकर्ण और इंद्रजीत का पुतला दहन किया जाता है. जानते हैं दशहरा का इतिहास और महत्व.

  • News18Hindi
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हाइलाइट्स

दशहरा के दिन शाम के समय में पुतला दहन किया जाता है.
भगवान श्रीराम ने दशहरा के दिन लंकापति रावण का वध किया था.
दशहरा मनाने का उद्देश्य लोगों को सत्य, धर्म और अच्छाई का संदेश देना है.

Dussehra 2022: दशहरा का त्योहार हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाते हैं. दशमी को विजयादशमी (Vijayadashami) के नाम से भी जानते हैं क्योंकि भगवान श्रीराम और लंका के राजा रावण के बीच घमासान युद्ध हुआ था और 10वें दिन प्रभु श्रीराम को विजय मिली थी. इस साल दशहरा का त्योहार 05 अक्टूबर दिन बुधवार को है. इस दिन शाम के समय में पुतला दहन किया जाता है.
तिरूपति के ज्योतिषाचार्य डाॅ. कृष्ण कुमार भार्गव बता रहे हैं दशहरा के पौराणिक महत्व के बारे में.

दशहरा क्यों मनाते हैं?
त्रेता युग में दशहरा के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति दसानन रावण का वध किया था. भगवान राम और रावण के बीच लगातार 10 दिनों तक भीषण युद्ध चला. 10वें दिन जाकर रावण भगवान श्रीराम के हाथों मारा गया. इस युद्ध का कारण था प्रभु श्रीराम की पत्नी सीता का अपहरण.

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रावण की बहन शूर्पणखा ने प्रभु राम और लक्ष्मण के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा था, लेकिन दोनों ने मना कर दिया. फिर भी वह विवाह के लिए कहती रही, तब लक्ष्मण जी ने उसका नाक और कान काट लिया. तब रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और लंका के अशोक वाटिका में उनको रखा था. हनुमान जी, सुग्रीव, जामवंत और वानर सेना की मदद से माता सीता का पता चला और फिर प्रभु राम ने लंका पर चढ़ाई कर दी, जिसके फलस्वरूप पूरे राक्षस जाति का अंत हो गया.

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भगवान राम के हाथों रावण का वध असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है. यह बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव है. इस वजह से हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है. हर साल दशहरा मनाने का उद्देश्य लोगों को सत्य, धर्म और अच्छाई का संदेश देना है. सत्य की राह पर चलने में कठिनाइयां आएंगी, लेकिन अंत में जीत उसकी ही होगी, इसलिए कभी भी सत्य के मार्ग से हटना नहीं चाहिए. अपने अंदर की बुराइयों को दूर करके स्वयं को अच्छा बनाने का भी संदेश दशहरा में छिपा है.

कैसे मनाते हैं दशहरा का उत्सव?
दशहरा के दिन रावण, कुंभकर्ण और इंद्रजीत के बड़े-बड़े पुतले बनाए जाते हैं. उनमें पटाखे भरे जाते हैं. ये पुतले दिखने में काफी बड़े होते हैं. ऐसे ही बुराई भी बड़ी होती है. शाम के समय में इन पुतलों में आग लगाया जाता है. पटाखों के जलने से पुतले जलकर राख हो जाते हैं. वैसे ही जब अच्छाई बढ़ती है तो बड़ी बुराई का भी अंत इन पुतलों के जैसे हो जाता है. रावण दहन के साथ दशहरा का उत्सव संपन्न होता है. नवरात्रि में 10 दिनों तक जो राम लीलाओं का मंचन होता है, उनका समापन दशहरा को होता है.

Tags: Dharma Aastha, Dussehra Festival

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