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Dussehra 2022: दशहरे के दिन क्यों बांटी जाती हैं शमी की पत्तियां? जानें इसका कारण

दशहरे पर शमी की पत्तियां बांटने की परंपरा काफी पुरानी है. (Photo: Shutterstock)

दशहरे पर शमी की पत्तियां बांटने की परंपरा काफी पुरानी है. (Photo: Shutterstock)

नवरात्रि के बाद पर्व आता है दशहरे का. इस दिन रावण का दहन कर सदियों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी जीवित रखा गया है. अस ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

शमी के वृक्ष की पूजा करने से आरोग्य और धन की प्राप्ति होती है.
शमी की पत्तियां विजयदशमी के दिन स्पर्श करने से सुख-समृद्धि और विजय प्राप्त होती है.

 Dussehra 2022 : हिंदू धर्म के बड़े त्योहारों में से एक नवरात्रि 26 सितंबर 2022 से आरंभ होने वाली है. अश्विन मास की शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. इन 9 दिन की पूजा के बाद दशहरा मनाया जाता है, जिसे विजयदशमी के रूप में भी जाना जाता है. असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक दशहरे पर रावण का दहन किया जाता है, इसके अलावा इस दिन शमी की पत्तियां भी बांटी जाती हैं. ऐसा करने के पीछे क्या वजह है? इस विषय में हमें बता रहे हैं भोपाल के रहने वाले ज्योतिषी एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

सनातन धर्म में विजयदशमी के दिन शमी के पेड़ की पूजा करना सदियों पुरानी परंपरा है. इस पूजा का क्षत्रियों में विशेष महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत में युद्ध के समय पांडवों ने शमी के वृक्ष के ऊपर ही अपने हथियार छुपाए थे और उन्हें कौरवों से जीत मिली थी. विजयदशमी के दिन शाम के समय शमी के वृक्ष की पूजा करने से आरोग्य और धन की प्राप्ति होती है.

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क्यों बांटी जाती हैं शमी की पत्तियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम जब लंका पर आक्रमण करने के लिए निकल रहे थे. उसके पहले उन्होंने शमी के वृक्ष के सामने अपनी जीत की प्रार्थना की थी. भगवान राम ने शमी की पत्तियों का स्पर्श किया और उन्हें विजय प्राप्त हुई. तभी से यह मान्यता आज तक चली आ रही है कि शमी की पत्तियां विजयदशमी के दिन स्पर्श करने या एक दूसरे को देने से सुख-समृद्धि और विजय प्राप्त होती है.

इसके अलावा शमी की पत्तियों को एक लंबे समय के बाद सोने के समान मान लिया गया और दशहरे के दिन शुभकामना के तौर पर शमी की पत्तियों का आदान-प्रदान किया जाने लगा. इसके पीछे उद्देश्य है कि सोने जैसी यह पत्तियां आपके जीवन में सौभाग्य और समृद्धि लेकर आएं.


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फसलों के फलने और सूखे के संकेत
विक्रमादित्य के समय के सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य वराहमिहिर ने अपने ग्रंथ में उल्लेख किया है कि जिस साल शमी का वृक्ष अधिक फलता-फूलता है, उस साल सूखे की स्थिति बनती है. विजयदशमी के दिन शमी के वृक्ष की पूजा करने से किसानों को फसल से संबंधित विपत्तियों का पूर्वानुमान हो जाता है, जिससे वे समय रहते संकट का सामना करने के लिए तैयार हो जाते हैं.

Tags: Dharma Aastha, Dussehra Festival, Navratri, Religion

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