Dusshera 2020: जानें दशहरा से जुड़ी परंपरा और विजय दशमी का शुभ मुहूर्त

इसी दिन भगवान राम ने अहंकारी रावण का वध कर के माता सीता को उसके चंगुल से बचाया था.
इसी दिन भगवान राम ने अहंकारी रावण का वध कर के माता सीता को उसके चंगुल से बचाया था.

दशहरा (Dusshera) का मुहूर्त सभी तरह के काम के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है. ऐसे में शत्रुओं पर जीत हासिल करने के लिए, नया वाहन, नए आभूषण, या किसी भी तरह की कोई खरीददारी करने के लिए यह दिन बेहद शुभ माना गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2020, 5:21 AM IST
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Dusshera 2020: हिन्दू धर्म में जितने भी त्योहार मनाए जाते हैं उन सब का कोई न कोई संदेश अवश्य होता है. ठीक उसी तरह आज हम जिस त्योहार की बात करने जा रहे हैं, उसका सन्देश होता है- बुराई पर अच्छाई की जीत. जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं दशहरे (Dusshera) के त्योहार के बारे में. हिन्दू पंचाग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी (Dashami) को और दिवाली से ठीक बीस दिन पहले विजयदशमी अथवा दशहरे का त्योहार देशभर में मनाया जाता है. इस वर्ष दशहरे का त्योहार 25 अक्टूबर (रविवार) के दिन मनाया जाएगा. इसी दिन भगवान राम ने अहंकारी रावण का वध कर के माता सीता को उसके चंगुल से बचाया था. देश के कई हिस्सों में यह दिन विजयदशमी के रूप में भी मनाया जाता है. जहां मान्यतानुसार यह दिन विजया माता से भी जोड़कर देखा जाता है, वहीं बहुत से लोग इस दिन को आयुध पूजा के रूप में भी मनाते हैं. आयुध पूजा अर्थात शस्त्र पूजा.

दशहरा के दिन से जुड़ी परंपरा
दशहरा का मुहूर्त सभी तरह के काम के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है. ऐसे में शत्रुओं पर जीत हासिल करने के लिए, नया वाहन, नए आभूषण, या किसी भी तरह की कोई खरीददारी करने के लिए भी यह दिन बेहद शुभ माना गया है. इस दिन कोई भी नया और शुभ काम किया जा सकता है. नया काम इस दिन शुरू किया जाये तो सफलता अवश्य प्राप्त होती है. शमी के पेड़ और शस्त्र की पूजा के साथ-साथ रावण दहन की राख को घर में लाना भी बेहद शुभ माना गया है.

विजय दशमी मुहूर्त
विजय दशमी मुहूर्त- दोपहर 13:57:06 से 14:41:57 तक


अवधि- 44 मिनट
अपराह्न मुहूर्त- दोपहर 13:12:15 से 15:26:48 तक

दशहरा से जुड़ी पौराणिक कथा
इस दिन के बारे में सबसे प्रचलित कथा तो भगवान राम और रावण से ही जुड़ी है. इसके अलावा एक दूसरी कथा के अनुसार बताया जाता है कि, दुर्योधन ने जब जुए के खेल में पांडवों को हरा दिया था, तब शर्त के अनुसार पांडवों को बारह वर्षों को निर्वासित रहना था. साथ ही पांडवों के एक साल का अज्ञातवास भी किया था. पांडवों को एक वर्ष तक अज्ञातवास में रहना था, और यदि इस दौरान उन्हें कोई देख लेता तो उन्हें फिर से बारह वर्षों का निर्वासित रहना पड़ता. ऐसे में इन सब से बचने के लिए अर्जुन ने अपने गांडीव धनुष को शमी के वृक्ष में छिपा कर रख दिया और खुद भेष बदलकर राजा विराट के लिए काम करने लगे.

एक बार जब राजा के पुत्र ने अर्जुन से अपनी गायों को बचाने का आग्रह किया तब अर्जुन ने शमी के पेड़ से अपने धनुष को निकालकर दुश्मनों को हराया था. कहा जाता है कि जिसे असलियत में दशहरा पर्व का असली रंग देखना हो उसे जीवन में एक बार तो मैसूर अवश्य जाना चाहिए. मैसूर का दशहरा पर्व बहुत ही प्रसिद्ध है और इसे बेहद ही भव्य और शानदार तरीके से मनाया जाता है. दशहरा त्योहार से लोग दिवाली उत्सव के लिए अपनी तैयारियां शुरू कर देते हैं.

धन प्राप्ति के लिए करें ये उपाय
दशहरा वाले दिन घर में शमी का पेड़ लगाएं. इसमें नियमित रूप से पानी डालें और हर शनिवार के दिन संध्या काल में इसके समक्ष दीपक जलाएं. ऐसा करने से घर में पैसों का अभाव कभी भी नहीं होता है. (साभार- Astrosage.com)
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