Eid Ul Adha 2020: कोरोना काल में ऐसे मनेगी मुस्लिमों की ईद, धर्मगुरुओं ने की अपील

Eid Ul Adha 2020: कोरोना काल में ऐसे मनेगी मुस्लिमों की ईद, धर्मगुरुओं ने की अपील
ईद उल अजहा मुसलमानों के खास त्‍योहारों में से एक है.

देश-दुनिया पर कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर भी हावी है. ऐसे हालात में मुसलमान इस साल ईद उल अजहा (Eid Ul Adha 2020) किस तरह मनाएंगे और किस तरह कुर्बानी देंगे, यह उनके लिए अहम सवाल बन कर सामने है.

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कुर्बानी की प्रतीक ईद उल अजहा (Eid Ul Adha 2020) करीब है. मगर देश-दुनिया पर कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर भी हावी है. ऐसे हालात में ईद (Eid) का रंग फीका रहने का पूरा अंदेशा है. इसकी वजह यह है कि लोग घरों में कैद हैं और हर बार ईद पर लगने वाला मवेशियों का बाजार (Cattle Market) भी अपनी पहले जैसी रौनक में नहीं है. इन हालात में मुसलमान इस साल ईद उल अजहा किस तरह मनाएंगे और किस तरह कुर्बानी देंगे, यह उनके लिए अहम सवाल बन कर सामने है.

दरअसल, ईद उल अजहा मुसलमानों के खास त्‍योहारों में से एक है. इस बार ईद उल अजहा 1 अगस्‍त को मनाई जा रही है. इस्लाम मजहब में साल में दो बार ईद मनाई जाती है. रमजान के बाद ईद-उल फितर मनाई जाती है और इसके 70 दिन बाद ईद-उल अजहा का मौका आता है. इसमें ईद की नमाज के साथ ही जानवरों की कुर्बानी करने का रिवाज भी है. इस्लामिक इतिहास के मुताबिक हजरत इब्राहिम का ईमान परखने को उनके बेटे की कुर्बानी मांगी गई थी. इसके बाद उन्‍होंने अपने बेटे को कुर्बानी के लिए आगे कर दिया. मगर ऐन वक्‍त पर अल्लाह ने उनके बेटे को जीवनदान दे दिया. इसके बाद से ही कुर्बानी की प्रतीक के तौर पर ईद उल अजहा को हर साल मनाया जाता है. भारत समेत कई एशियाई देशों जैसे बांग्लादेश, पाकिस्तान में भी ईद उल अजहा को बकराईद कहा जाने लगा है.

इस ईद पर मुस्लिम समुदाय के लोग पहले नमाज अदा करते हैं और फिर इसके बाद बकरे आदि की कुर्बानी दी जाती है. ईद के मौके पर लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के गले मिलते हैं और एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं. हालांकि इस बार कोरोना वायरस के मद्देनजर ईद उल अजहा को लेकर ज्‍यादा एहतियात बरती जा रही है, ताकि कोरोना का इंफेक्‍शन न फैले. यही वजह है कि ईद की नमाज को लेकर भी सरकार की ओर से गाइडलाइन जारी कर दी गई है. लोगों से घरों में रह कर ही नमाज अदा करने को कहा गया है. वहीं मस्जिदों में भी मुनासिब दूरी रख कर ही नमाज की ताकीद की गई है. वहीं ईद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी दिए जाने को लेकर भी सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन पर अमल करने को कहा गया है.



कोरोना के खतरे को देखते हुए मुस्लिम धर्मगुरुओं की ओर से भी मुस्लिम समुदाय से अपील की गई है कि वे गर्वनमेंट की ओर से जारी गाइडलाइन पर अमल करें. इस संबंध में जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी (Maulana Arshad Madani) ने मुसलमानों से अपील की है कि 'लोग ईद की नमाज मस्जिद में या घर में अदा करें और जो हेल्‍थ मिनिस्‍ट्री की गाइडलाइन हैं उन पर अमल करते हुए अदा करें. यानी नमाज के दौरान जरूरी फासला बनाए रखें. अगर नमाज के लिए मस्जिद जा रहे हैं, तो पढ़ कर फौरन घर आ जाएं. बाहर चौपाल न लगाएं. हमारा लोगों के लिए यही मशवरा है.'
वह आगे कहते हैं, 'अगर लोग कुर्बानी कर रहे हैं तो सफेद जानवर के साथ-साथ ऊंट की कुर्बानी भी न करें. यानी कुर्बानी सिर्फ काले जानवर की ही करें और जिसको लेकर किसी तरह की दुश्‍वारी पैदा न हो उसकी ही कुर्बानी करें. साथ ही इस बारे में स्‍थानीय प्रशासन को भी आगाह जरूर कर दें.'

वहीं शिया मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना कल्‍बे जवाद नकवी (Kalbe Jawad Naqvi) की ओर से कहा गया है कि भीड़ जमा होने से कोरोना फैलने का खतरा है. बहरहाल, लोग घरों में रह कर नमाज पढ़ें और कुर्बानी के सिलसिले में भी गाइडलाइन पर अमल हो. वे खुले में कुर्बानी न करें. कुर्बानी के बाद साफ-सफाई पर खास ध्‍यान देते हुए बचे हुए अंगों को दफन कर दिया जाए. कोरोना तेजी से फैल रहा है और इसका अभी तक कोई इलाज नहीं है. ऐसी सूरते-हाल में एहतियात बहुत जरूरी है.

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दरगाहे-आला हजरत (Dargah Ala Hazrat) की ओर से ईद की नमाज और ईद उल अजहा के मद्देनजर मुसलमानों से अपील की गई है कि वे खुले में मवेशियों की कुर्बानी न दें. दूसरे धर्म के लोगों को कोई दिक्कत न हो इसलिए जरूरी एतियात बरतें. साथ ही प्रशासन की गाइडलाइन (Guideline) के मुताबिक ही ईद उल अजहा की नमाज अदा करें.
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