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Sankashti Chaturthi 2021 Date: एकदंत संकष्टी चतुर्थी कब है? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी की पूजा चंद्रमा के उदय के बाद ही पूरी मानी जाती है

Ekdant Sankashti Chaturthi 2021 Date: एकदंत संकष्टी चतुर्थी गणेश भगवान को समर्पित मानी जाती है. इस दिन 2 शुभ योग भी लग रहे हैं. ये योग हैं- शुभ और शुक्ल योग. शुभ योग सुबह 11 बजकर 30 मिनट तक है. इसके बाद शुक्ल योग है.

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    Ekdant Sankashti Chaturthi 2021 Date: एकदंत संकष्टी चतुर्थी कल यानि कि 29 मई शनिवार, ज्येष्ठ माह की तृतीया तिथि को मनाई जाएगी. हिंदू धर्म में एकदंत संकष्टी चतुर्थी का बहुत महत्व बताया गया है. यह संकष्टी चतुर्थी सर्वप्रथम पूज्य गणेश भगवान को समर्पित मानी जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, विघ्नहर्ता भगवान गणेश इस व्रत को करने वाले सभी जातकों के जीवन के कष्ट हर लेते हैं और उनके बिगड़े हुए काम भी बनाते हैं. इस बार एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन 2 शुभ योग भी लग रहे हैं. ये योग हैं- शुभ और शुक्ल योग. शुभ योग सुबह 11 बजकर 30 मिनट तक है. इसके बाद शुक्ल योग है. संकष्टी चतुर्थी पर भक्त व्रत रखेंगे और गणेश भगवान की पूजा अर्चना करेंगे. पूजा घर पर ही करें . कोरोना की दूसरी लहर की वजह से लॉकडाउन लगा हुआ है जिस कारण मंदिर जाकर पूजा करने का विचार त्याग दीजिएगा. संकष्टी चतुर्थी की पूजा चंद्रमा के उदय के बाद ही पूरी मानी जाती है. आइए जानते हैं व्रत का मुहूर्त और पूजा विधि...

    एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2021 शुभ मुहूर्त:

    ब्रह्म मुहूर्त- 03:35 सुबह से 04:17 सुबह तक.
    अभिजीत मुहूर्त- 11:18 सुबह से 12:13 शाम तक.
    विजय मुहूर्त- 02:01 दोपहर से 02:55 दोपहर तक.
    गोधूलि मुहूर्त- 06:19 शाम से 06:43 शाम तक.
    अमृत काल- 01:40 दोपहर से 03:08 दोपहर तक.
    निशिता मुहूर्त- 11:25 रात से 12:06 प्रातः मई 30 तक.
    चन्द्रोदय मुहूर्त: रात 10 बजकर 30 मिनट.








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    एकदंत संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि:
    -संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्यकर्म और स्नान करने बाद पूजाघर की साफ सफाई करें, आसन पर बैठकर व्रत का संकल्प लें और पूजा शुरू करें.
    -गणेश भगवान गणेश जी की प्रिय चीजें पूजा में अर्पित करें और उन्हें मोदक का भोग लगाएं.
    -संकष्टी चतुर्थी का व्रत सूर्योदय के समय से लेकर चन्द्रमा उदय होने के समय तक व्रत रखा जाता है.
    - चंद्रमा दर्शन के बाद ही गणेश चतुर्थी व्रत पूर्ण माना जाता है. इसके बाद व्रती व्रत का पारण कर सकता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें).
    Published by:Bhagya Shri Singh
    First published: