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हनुमान जी के 5 ऐसे चमत्कारी मंदिर, जहां भक्त की हर मनोकामना होती है पूरी

News18Hindi
Updated: May 19, 2020, 8:32 AM IST
हनुमान जी के 5 ऐसे चमत्कारी मंदिर, जहां भक्त की हर मनोकामना होती है पूरी
मान्यता है कि हनुमान जी एकमात्र ऐसे देवता हैं जो आज भी देश में भ्रमण करते हैं.

आज मंगलवार (Tuesday) है. आज के दिन भक्त हनुमान जी की पूजा अर्चना करते हैं. हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करते हैं और बूंदी के लड्डुओं का प्रसाद चढ़ाते हुए आरती करते हैं.

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हनुमान जी (Hanuman Ji) जल्द ही प्रसन्न होने वाले भगवान हैं. उनकी पूजा करने के लिए किसी विशेष तैयारी की भी जरूरत नहीं होती. मान्यता है कि हनुमान जी एकमात्र ऐसे देवता (God) हैं जो आज भी देश में भ्रमण करते हैं. आज मंगलवार (Tuesday) है. आज के दिन भक्त हनुमान जी की पूजा अर्चना करते हैं. हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करते हैं और बूंदी के लड्डुओं का प्रसाद चढ़ाते हुए आरती करते हैं. आइए आज हम आपको देश के ऐसे 5 चमत्कारी हनुमान मंदिर (Hanuman Temple) के बारे में बताते हैं जहां पूजा करने से हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है.

संकटमोचन मंदिर, बनारस
हनुमान जी का यह मंदिर बनारस में स्थित है. माना जाता हैं कि इस मंदिर की स्थापना वही हुई है जहां महाकवि तुलसीदास को पहली बार हनुमान का स्वप्न आया था. संकट मोचन मंदिर की स्थापना कवि तुलसीदास ने की थी. इस मंदिर में दर्शन मात्र से ही हनुमान जी अपने हर भक्त की हर मनोकामना पूरी कर देते हैं. हर मंगलवार और शनिवार को हजारों की तादाद में लोग हनुमान जी की पूजा अर्चना करने के लिए यहां पहुंचते हैं.

उलटे हनुमानजी का मंदिर, इंदौर



उलटे हनुमानजी का मंदिर इंदौर में स्थित है. इस मंदिर की खासियत यह है कि इसमें हनुमानजी की उलटी मूर्ति स्थापित है. कहते हैं कि जब अहिरावण भगवान श्रीराम व लक्ष्मण का अपहरण कर पाताल लोक ले गया था, तब हनुमान ने पाताल लोक जाकर अहिरावण का वध कर श्रीराम और लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की थी. ऐसी मान्यता है कि यह वही स्थान है, जहां से हनुमानजी ने पाताल लोक जाने के लिए पृथ्वी में प्रवेश किया था. इस मंदिर में प्रत्येक मंगलवार को हनुमानजी को चौला चढ़ाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि तीन मंगलवार या पांच मंगलवार यहां दर्शन करने से जीवन में आई कठिन से कठिन विपदा दूर हो जाती है.



हनुमान धारा मंदिर, चित्रकूट
हनुमान धारा मंदिर उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में स्थित है. इसके बारे में कहा जाता है की जब हनुमान जी ने लंका में आग लगाई थी तो उसके बाद उनकी पूंछ में लगी आग को बुझाने के लिए वह इस जगह आए जिन्हें भक्त हनुमान धारा कहते हैं. यह विन्ध्यास के शुरुआत में राम घाट से 4 किलोमीटर दूर है. एक चमत्कारिक पवित्र और ठंडी जल धारा पर्वत से निकल कर हनुमान जी की मूरत की पूंछ को स्नान कराकर निचे कुंड में चली जाती है. यहां हनुमान जी की विशाल मूर्ति के पास दो जल कुंड हैं. यहां हर मनोकामना पूरी होती है.

हनुमान मंदिर, इलाहाबाद
इलाहाबाद का हनुमान मंदिर अपनी खास बनावट के लिए मशहूर है. ये दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां हनुमान की लेटी हुई 20 फीट की मूर्ति है. कहा जाता है कि संगम आने वाले लोगों की यात्रा इस मंदिर में दर्शन के बिना अधूरी है. नदी में बाढ़ के दौरान मंदिर पूरी तरह से डूब जाता है. पुराणों के अनुसार उस वक्त गंगा हनुमान जी को स्नान कराने आती हैं. मान्यता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम संगम स्नान करने आए थे. तभी उनके प्रिय भक्त हनुमान शारीरिक कष्ट से पीड़ित होकर यहां गिर पड़े थे. तब माता जानकी ने अपने सिंदूर से उन्हें नया जीवन देते हुए हमेशा आरोग्य और चिरायु रहने का आशीर्वाद दिया था. तभी से यहां मंदिर में हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की भी परंपरा है. इस मंदिर में हनुमान जी की दर्शन करने मात्र से ही सभी तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं.

हनुमानगढ़ी मंदिर, अयोध्या
अयोध्या को भगवान राम की नगरी कहा जाता है. मान्यता है कि यहां हनुमान जी सदैव वास करते हैं. इसलिए अयोध्या आकर भगवान राम के दर्शन से पहले भक्त हनुमान जी के दर्शन करते हैं. यहां का सबसे प्रमुख श्री हनुमान मंदिर, हनुमानगढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है. यह मंदिर राजद्वार के सामने ऊंचे टीले पर स्थित है. कहा जाता है कि हनुमान जी यहां एक गुफा में रहते थे और रामजन्मभूमि और रामकोट की रक्षा करते थे. हनुमान जी को रहने के लिए यही स्थान दिया गया था. हनुमानगढ़ी जिसे हनुमान जी का घर भी कहा जाता है, यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है. इस मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करने के लिए 60 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है. यहां पर हर मनोकामना पूरी होती है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.
First published: May 19, 2020, 8:32 AM IST
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