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Ganesh Utsav 2021: भगवान गणेश दूसरे देवताओं के विवाह में क्यों डालते थे बाधा? पढ़ें पौराणिक कथा

श्रीगणेश भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं- Image/pexels

श्रीगणेश भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं- Image/pexels

Ganesh Utsav 2021: भगवान गणेश का विवाह (Marriage) ब्रह्माजी की मानस पुत्रियों ऋद्धि-सिद्धि से हुआ है. मान्यता के अनुसार श्रीगणेश के दो पुत्र (Son) शुभ-लाभ भी हैं.

  • News18Hindi
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    Ganesh Mahotsav 2021: ये तो आप जानते ही होंगे कि श्रीगणेश (Shri Ganesh) भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं और श्रीगणेश को देवताओं में सर्वप्रथम पूजा जाता है लेकिन क्या आप ये जानते हैं, कि भगवान श्रीगणेश का विवाह किससे और कैसे हुआ था? अगर नहीं तो आइये हम आपको बताते हैं कि पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रीगणेश के विवाह की कहानी क्या है.

    श्रीगणेश विवाह की कहानी 

    पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीगणेश का विवाह नहीं हो पा रहा था. क्योंकि कोई भी कन्या उनसे विवाह करने को राजी नहीं हो रही थी. इसकी वजह थी कि उनका सिर हाथी का था और उनका एक दांत टूटा हुआ था. अपना विवाह न होता देख वो काफी उदास रहने लगे और उन्होंने किसी और देवता के विवाह में जाना कम कर दिया क्योंकि वहां जाकर उनको दुख होता था. कहा जाता है कि इस दुख की वजह से भगवान श्रीगणेश ने दूसरे देवताओं के विवाह में विघ्न डालना शुरू कर दिया. जिसमें उनकी सहायता उनका वाहन मूषक भी करता था. वह श्रीगणेश के आदेश पर देवताओं के विवाह मंडप को नष्ट कर देता था.

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    ऐसा जब कई बार हुआ तो सभी देवता परेशान होने लगे और अपनी समस्या को लेकर श्रीगणेश के माता-पिता के पास गए. लेकिन उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए सभी देवताओं को ब्रह्मा जी के पास भेज दिया. जब देवतागण वहां पहुंचे तो उस समय ब्रह्मा जी योग में लीन थे. तभी ब्रह्मा जी के योग से वहां दो कन्याएं ऋद्धि-सिद्धि प्रकट हुईं, जो ब्रह्माजी की मानस पुत्री कहलाईं. इन दोनों पुत्रियों को लेकर ब्रह्मा जी श्रीगणेश के पास पहुंचे और कहा कि आपको इन दोनों पुत्रियों को शिक्षा देनी होगी. जिसके लिए श्रीगणेश तैयार हो गए और उनकी शिक्षा प्रारंभ कर दी. जब ऋद्धि-सिद्धि की शिक्षा चल रही थी, उस समय जब मूषक किसी देवता के विवाह की सूचना देने श्रीगणेश के पास आता, तो दोनों उनका ध्यान भटकाने के लिए कोई प्रसंग छेड़ देती थीं. इस तरह श्रीगणेश को किसी देवता के विवाह का पता नहीं चल पाता और देवताओं का विवाह बिना किसी विघ्न के सम्पूर्ण हो जाता था.

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    एक दिन श्रीगणेश को इन बातों के बारे में पता चल गया कि ऋद्धि-सिद्धि उनका ध्यान भटकाने के लिए ही शिक्षा ग्रहण करने आई हैं. उन दोनों की वजह से ही देवताओं का विवाह सम्पूर्ण हो रहा है. तो इस पर श्रीगणेश बहुत क्रोधित हुए. ये देखकर उसी समय ब्रह्मा जी वहां प्रकट हुए और उनके क्रोध को शांत करने के लिए श्रीगणेश से कहने लगे कि मुझे अपनी दोनों पुत्रियों ऋद्धि-सिद्धि के लिए कोई योग्य वर नहीं मिल रहा है. इसलिए आप ही अगर इन दोनों से विवाह कर लें तो बेहतर होगा. इसके लिए श्रीगणेश तैयार हो गए और उनका विवाह ऋद्धि-सिद्धि के साथ धूमधाम से सम्पन्न हुआ. मान्यता के अनुसार विवाह के बाद श्रीगणेश के दो पुत्र भी हुए, जिनको शुभ और लाभ के नाम से जाना और पूजा जाता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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