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कृष्णावतार में सुदर्शन चक्र था मुख्य अस्त्र, लेकिन रामावतार में क्‍यों नहीं था ऐसा?

कृष्णावतार में सुदर्शन चक्र था मुख्य अस्त्र, लेकिन रामावतार में क्‍यों नहीं था ऐसा?

सुदर्शन चक्र कृष्ण अवतार में था, लेकिन राम के पास नहीं था.

सुदर्शन चक्र कृष्ण अवतार में था, लेकिन राम के पास नहीं था.

सुदर्शन चक्र चतुर्भुज विष्णु भगवान के पास हमेशा से रहा है. उन्‍होंने अपने अवतारों में उसे आवश्‍यकतानुसार ही धारण किया. श्रीराम अवतार में उन्‍होंने हमेशा धनुष, श्रीकृष्णावतार में चक्र रखा, जबकि मूलरूप में भगवान चक्र, गदा, धनुष तीनों अस्त्र-शस्त्र रखते हैं.

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हाइलाइट्स

विश्वामित्र ने श्रीराम को अनेक अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान दिया था, जिनमें चक्र भी था.
श्रीराम ने राक्षसों का संहार किया, वहीं श्रीकृष्ण ने अन्‍य योनियों से भी संघर्ष किया था.

उत्‍तर-मध्‍य भारत में हिंदू धर्म के अनुयायी ईश्‍वर का श्रीराम और श्रीकृष्ण के रूप में स्मरण करते हैं. धर्म ग्रंथों के अनुसार, दोनों ही भगवान विष्णु के अवतार हैं, इसलिए एक ही हैं. दोनों के प्राकट्य के युग अलग थे. दोनों के कुल भी अलग-अलग थे. पहले विष्‍णुजी ने त्रेतायुग के अंतिम चरण में श्रीराम के रूप में अवतार लिया, जिसमें वह सूर्यवंशी थे. उसके बाद द्वापर युग के अंतिम चरण में उन्‍होंने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया, जिसमें वह चंद्रवंशी थे. दोनों की आयु सीमा में भी अंतर रहा. श्रीराम के बारे में जहां 10 हजार वर्ष तक शासन करने की मान्‍यता है, वहीं कृष्ण कुछ सौ वर्ष तक ही धरती पर रहे. आजकल लोग अनजाने से सवाल करते हैं. जैसे- श्रीराम या श्रीकृष्ण की मूंछें नहीं थीं क्‍या? उनका रंग कैसा था? कौन-कौन से अस्त्र-शस्त्र वे रखते थे? उनमें 12 कला या 16 कलाएं होने का तात्पर्य क्‍या है…आदि-इत्‍यादि सवाल.

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श्रीरामकथा का पाठ करने वाले ब्रजभूमि के कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर बताते हैं कि हमारे धर्मग्रंथों में श्रीराम, श्रीकृष्ण की लीलाओं का खूब वर्णन है, बशर्ते आपके पास अध्‍ययन करने के लिए समय हो और जिज्ञासा हो.

देवकीनंदन कहते हैं, ‘भगवान विष्णु मूलस्‍वरूप में ‘श्रीहरि’ हैं, वही ईश्‍वर हैं. यह बात उन्होंने महाभारत काल में अर्जुन को विराट रूप के दर्शन कराते समय कही थी कि वे ही आरंभ और अंत हैं. वे सब प्राणियों में हैं और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं.

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अब कोई यह सवाल करे कि वह जब कृष्ण के रूप में अवतरित हुए तो उनके पास सुदर्शन चक्र था, रामावतार में क्‍यों नहीं? इसका जवाब भी रामायण में मिलेगा. ऋषि विश्वामित्र ने उन्‍हें अनेक अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान दिया था, जिनमें चक्र भी था. हालांकि, रामजी ने धनुष धारण किया, जो उस युग में उनके लिए उपयुक्त था. कृष्ण अवतार में उन्‍हें अधिक माया-शक्ति के साथ आना पड़ा, इसलिए सुदर्शन चक्र के साथ रहे.’

Tags: Dharma Aastha, Lord krishna

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