Govardhan Puja 2020: गोवर्धन पूजा में इस खास मंत्र का करें इस्तेमाल, पढ़ें ये आरती

पूजा वाले दिन घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ की प्रतिमा बनाई जाती है.
पूजा वाले दिन घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ की प्रतिमा बनाई जाती है.

गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2020) को अन्नकूट पूजा (Annakoot Puja) भी कहा जाता है. इस दिन गेहूं, चावल जैसे अनाज, बेसन से बनी कढ़ी और पत्ते वाली सब्जियों से बने भोजन को पकाया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) को अर्पित किया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 8:15 AM IST
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दिवाली (Diwali 2020) के ठीक दूसरे दिन गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) की जाती है. इस साल गोवर्धन पूजा 15 नवंबर 2020 को है. हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है. इस दिन गोवर्धन और गाय की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन लोग घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत का चित्र बनाकर गोवर्धन भगवान की पूजा करते हैं. आइए जानते हैं गोवर्धन पूजा विधि, मूल मंत्र और आरती के बारे में.

गोवर्धन पूजा विधि
गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है. इस दिन गेहूं, चावल जैसे अनाज, बेसन से बनी कढ़ी और पत्ते वाली सब्जियों से बने भोजन को पकाया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया जाता है. पूजा वाले दिन घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ की प्रतिमा बनाई जाती है. इसके बाद रोली, चावल, खीर, बताशे, जल, दूध, पान, केसर, फूल आदि से दीपक जलाकर उसकी पूजा करें. गोबर से बनाए गए गोवर्धन की परिक्रमा करें. फिर ब्रज के देवता गिरिराज भगवान को प्रसन्न करने के लिए अन्नकूट भोग लगाएं. अन्नकूट में 56 प्रकार के खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं. इस दिन प्रदोष काल (शाम के समय) में विधि-विधान से श्रीकृष्ण भगवान की पूजा की जाती है. साथ ही गोवर्धन पूजा के दिन गाय की पूजा कर उसे गुड़ और हरा चारा खिलाना शुभ माना जाता है.

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गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त


तिथि- कार्तिक माह शुक्ल पक्ष प्रतिपदा (15 नवंबर 2020)
गोवर्धन पूजा सायं काल मुहूर्त- दोपहर 3 बजकर 17 मिनट से शाम 5 बजकर 24 मिनट तक
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- सुबह 10:36 बजे से (15 नवंबर 2020)
प्रतिपदा तिथि समाप्त- सुबह 07:05 बजे तक (16 नवंबर 2020)

गोवर्धन पूजा मंत्र
गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।
विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव।।

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गोवर्धन आरती
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरी सात कोस की परिकम्मा,
और चकलेश्वर विश्राम
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे गले में कण्ठा साज रहेओ,
ठोड़ी पे हीरा लाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ,
तेरी झाँकी बनी विशाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण।
करो भक्त का बेड़ा पार
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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