Govardhan Puja 2020: गोवर्धन पूजा में क्या है भगवान श्रीकृष्ण के साथ गायों का महत्व?

गोवर्धन पूजा की कथा सुनें और प्रसाद वितरण करें
गोवर्धन पूजा की कथा सुनें और प्रसाद वितरण करें

गोवर्धन पर्वत (Govardhan Parvat) या गिरिराज पर्वत को भगवान कृष्ण (Lord Krishna) ने अपनी कनिष्ठ उंगली से ऊपर उठाकर बृजवासियों की भारी बारिश से जान बचाई थी.

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  • Last Updated: November 14, 2020, 10:29 AM IST
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गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2020) या अन्नकूट उत्सव (Annakoot Utsav 2020) दिवाली (Diwali 2020) के अगले दिन मनाया जाता है. गोवर्धन पर्वत या गिरिराज पर्वत को भगवान कृष्ण ने अपनी कनिष्ठ उंगली से ऊपर उठाकर बृजवासियों की भारी बारिश से जान बचाई थी. वहीं से गोवर्धन पूजा शुरू हो गई थी. भगवान श्री कृष्ण ने ही गोवर्धन पूजा करने के लिए कहा था. गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन सुबह जल्दी की जाती है. गोवर्धन पूजा शुरू करने के पीछे भी एक कहानी है. इसे अन्नकुट पूजा भी कहा जाता है.

गोवर्धन पूजा की कहानी
जब भगवान श्री कृष्ण ने बृजवासियों को इंद्र की पूजा करते हुए देखा तो उनके मन में इसके बारे में जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई. श्री कृष्ण की मां भी इंद्र की पूजा कर रही थीं. कृष्ण ने इसका कारण पूछा तब बताया गया कि इंद्र बारिश करते हैं, तब खेतों में अन्न होता है और हमारी गायों को चारा मिलता है. इस पर श्री कृष्ण ने कहा कि हमारी गायें तो गोवर्धन पर्वत पर ही रहती हैं इसलिए गोवर्धन पर्वत की पूजा की जानी चाहिए. इस पर बृजवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी तब इंद्र को क्रोध आया और उन्होंने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी. चारों तरफ पानी के कारण बृजवासियों की जान बचाने के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठा लिया. लोगों ने उसके नीचे शरण लेकर अपनी जान बचाई. इंद्र को जब पता चला कि कृष्ण ही विष्णु अवतार हैं, तब उन्होंने उनसे माफी मांगी. इसके बाद श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के लिए कहा और इसे अन्नकुट पर्व के रूप में मनाया जाने लगा.

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गोवर्धन पूजा में कृष्ण के साथ गायों का महत्व


श्री कृष्ण खुद गाय चराते थे इसलिए उन्हें ग्वाला भी कहा जाता है. गोवर्धन पर्वत पर गायें चरती थीं इसलिए कृष्ण ने पर्वत को ही गायों के भरण पोषण का श्रेय दिया और उनकी पूजा करने के लिए बृजवासियों से आग्रह किया. गायों को चारा मिलने की बात पर ही गोवर्धन पूजा के लिए श्री कृष्ण ने कहा था क्योंकि उन्हें गायों से काफी ज्यादा लगाव था. गोवर्धन पूजा में गाय के गोबर से घर में पर्वत बनाकर पूजा आज भी की जाती है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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