Govardhan Puja 2020: गोवर्धन पूजा को क्यों कहते हैं अन्नकूट उत्सव, पढ़ें ये पौराणिक कथा

अन्नकूट पर्व मनाने से मनुष्य को लंबी आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है.
अन्नकूट पर्व मनाने से मनुष्य को लंबी आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है.

अन्नकूट/गोवर्धन पूजा (Govardhan puja) भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारंभ हुई. यह ब्रजवासियों का मुख्य त्योहार है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 12, 2020, 12:34 PM IST
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दिवाली (Diwali 2020) के ठीक दूसरे दिन गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) या अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है. इस साल गोवर्धन पूजा 15 नवंबर 2020 को है. हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है. इस दिन गोवर्धन और गाय की पूजा का विशेष महत्व होता है. अन्नकूट/गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारंभ हुई. यह ब्रजवासियों का मुख्य त्योहार है. इस दिन मंदिरों में विविध प्रकार की खाद्य सामग्रियों से भगवान को भोग लगाया जाता है. इस दिन बलि पूजा और मार्गपाली उत्सव मनाए जाते हैं.

इस दिन गाय-बैल जैसे पशुओं को स्नान कराके धूप-चंदन तथा फूल माला पहनाकर उनका पूजन किया जाता है. इस दिन गौमाता को मिठाई खिलाकर उसकी आरती उतारते हैं तथा प्रदक्षिणा भी की जाती है. इस दिन गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसके समीप विराजमान कृष्ण के सम्मुख गाय तथा ग्वाल-बालों की रोली, चावल, फूल, जल, मौली, दही तथा तेल का दीपक जलाकर पूजा और परिक्रमा की जाती है.

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गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा
कहते हैं कि जब कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचाने के लिए 7 दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर इन्द्र का मान-मर्दन किया तथा उनके सुदर्शन चक्र के प्रभाव से ब्रजवासियों पर जल की एक बूंद भी नहीं पड़ी, सभी गोप-गोपिकाएं उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे, तब ब्रह्माजी ने इन्द्र को बताया कि पृथ्वी पर श्रीकृष्ण ने जन्म ले लिया है, उनसे बैर लेना उचित नहीं है, तब श्रीकृष्ण अवतार की बात जानकर इन्द्रदेव अपने इस कार्य पर बहुत लज्जित हुए और भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा-याचना की. भगवान श्रीकृष्ण ने 7वें दिन गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी. तभी से यह उत्सव 'अन्नकूट' के नाम से मनाया जाने लगा.

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन भगवान के निमित्त भोग और नैवेद्य बनाया जाता है जिन्हें '56 भोग' कहते हैं. अन्नकूट पर्व मनाने से मनुष्य को लंबी आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है. साथ ही दरिद्रता का नाश होकर मनुष्य जीवनपर्यंत सुखी और समृद्ध रहता है. ऐसा माना जाता है कि यदि इस दिन कोई मनुष्य दुखी रहता है तो वह वर्षभर दुखी ही रहेगा इसलिए हर मनुष्य को इस दिन प्रसन्न रहकर भगवान श्रीकृष्‍ण को प्रिय अन्नकूट उत्सव को भक्तिपूर्वक तथा आनंदपूर्वक मनाना चाहिए.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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