Gudi Padwa 2021: जानें कब मनाया जाएगा गुड़ी पड़वा, क्या है इसका महत्व और पूजा विधि

गुड़ी पड़वा का अनुष्ठान सूर्योदय से पहले आरंभ हो जाता है. लोग सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तेल लगाने के बाद स्नान करते हैं.

गुड़ी पड़वा का अनुष्ठान सूर्योदय से पहले आरंभ हो जाता है. लोग सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तेल लगाने के बाद स्नान करते हैं.

Gudi Padwa 2021: गुड़ी पड़वा के दिन महाराष्ट्र में कई समारोह आयोजित किए जाते हैं. लोग नए कपड़े पहनते हैं और अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ इस उत्सव को बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 1, 2021, 12:14 PM IST
  • Share this:
Gudi Padwa 2021: महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों में हिंदू नववर्ष को गुड़ी पड़वा के रूप में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. दक्षिण भारतीय राज्यों में, इस दिन को फसल दिवस के रूप में मनाते हैं. चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है. इस बार गुड़ी पड़वा 13 अप्रैल 2021 (सोमवार) को मनाया जाएगा. इस दिन घरों में पकवान बनाकर पूजा अर्चना की जाती है. मान्यताओं के अनुसार इस दिन को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. आइए आपको बताते हैं गुड़ी पड़वा का महत्व और इसकी पूजा विधि.

कैसे मनाया जाता है गुड़ी पड़वा

गुड़ी पड़वा के दिन महाराष्ट्र में कई समारोह आयोजित किए जाते हैं. लोग नए कपड़े पहनते हैं और अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ इस उत्सव को बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाते हैं. लोग अपने घरों में विशेष तौर पर पारंपरिक व्यंजन जैसे पूरन पोली और श्रीखंड तैयार करते हैं. महाराष्ट्र में मीठे चावल भी बनाए जाते हैं. इन चावलों को सक्कर भात कहा जाता है. इस दिन सूर्योदय के साथ ही विभिन्न अनुष्ठान आरंभ हो जाते हैं जो दिनभर चलते हैं.

इसे भी पढ़ेंः Chaitra Navratri 2021 Date: चैत्र नवरात्रि कब से शुरू हो रहे हैं? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
गुड़ी पड़वा का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने इस ब्रह्मांड का निर्माण किया था, इसलिए गुड़ी पड़वा के दिन, भगवान ब्रह्मा की पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि इस त्योहार पर सारी बुराइयों का नाश हो जाता है और सुख समृद्धि का आगमन होता है.

गुड़ी पड़वा की पूजा विधि



-गुड़ी पड़वा का अनुष्ठान सूर्योदय से पहले आरंभ हो जाता है. लोग सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तेल लगाने के बाद स्नान करते हैं.

-घर के मुख्य द्वार को आम के पत्तों और सुंदर फूलों से सजाया जाता है. इसके साथ ही रंगोली भी बनाई जाती है.

इसे भी पढ़ें: April 2021 Shubh Muhurat: जमीन-मकान और वाहन खरीदने के लिए ये हैं शुभ मुहूर्त, इस दिन करें मांगलिक कार्य

-इसके बाद एक स्थान को साफ करके वहां गुड़ी लगाई जाती है.

-पीले रंग के रेशमी कपड़े, आम के पत्तों और लाल रंग के फूलों की माला से गुड़ी को सजाया जाता है.

-लोग भगवान ब्रह्मा की पूजा करते हैं और उसके बाद गुड़ी फहराते हैं.

-गुड़ी फहराने के बाद भगवान विष्णु का आह्वान और पूजन किया जाता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज