Gupt Navratri 2020: महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए पढ़ें गुप्त नवरात्रि की पौराणिक कथा

Gupt Navratri 2020: महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए पढ़ें गुप्त नवरात्रि की पौराणिक कथा
गुप्त नवरात्रि की पौराणिक कथा

गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri 2020): अषाढ़ महीने में होने वाली नवरात्रि का ज्ञान कम ही लोगों को होता है इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है. इस नवरात्रि में विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है.

  • Share this:
गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri 2020): आज गुप्त नवरात्रि है. आज से तंत्र विद्या की साधना करने वाले साधक 10 महाविद्याओं को प्रसन्न करने हेतु विशेष पूजा अर्चना करेंगे. साल में चार नवरात्रि होती हैं. माघ महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है. ऐसा कहा जाता है कि अषाढ़ महीने में होने वाली नवरात्रि का ज्ञान कम ही लोगों को होता है इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है. इस नवरात्रि में विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है. आइए जानते हैं गुप्त नवरात्रि की पौराणिक कथा...

गुप्त नवरात्रि की पौराणिक कथा:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय की बात है जब ऋषि श्रंगी भक्तों को प्रवचन दे रहे थे. इसी दौरान भीड़ से एक स्त्री हाथ जोड़कर ऋषि के सामने आई और अपनी समस्या बताने लगी. स्त्री ने कहा कि उनके पति दुर्व्यसनों से घिरे हैं और इसलिए वह किसी भी प्रकार का व्रत, धार्मिक अनुष्ठान आदि नहीं कर पाती. स्त्री ने साथ ही कहा कि वह मां दुर्गा के शरण में जाना चाहती है लेकिन पति के पापाचार के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है.

यह सुन ऋषि ने बताया कि शारदीय और चैत्र नवरात्र में तो हर कोई मां दुर्गा की पूजा करता है और इससे सब परिचित भी हैं लेकिन इसके अलावा भी दो और नवरात्र हैं. ऋषि ने बताया कि दो गुप्त नवरात्र में 9 देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है. ऋषि ने स्त्री से कहा कि इसे करने से सभी प्रकार के दुख दूर होंगे और जीवन खुशियों से भर जाएगा. ऐसा सुनकर स्त्री ने गुप्त नवरात्र में गुप्त रूप से ऋषि के अनुसार मां दुर्गा की कठोर साधना की. मां दुर्गा इस श्रद्धा और भक्ति से हुईं और इसका असर ये हुआ कि कुमार्ग पर चलने वाला उसका पति सुमार्ग की ओर अग्रसर हुआ. साथ ही स्त्री का घर भी खुशियों से भर गया.
इसे भी पढ़ें: Gupt Navratri 2020: गुप्त नवरात्रि आज शुरू, नवदुर्गा नहीं इन महाविद्याओं की होगी पूजा



शारदीय और चैत्र नवरात्र की तरह ही गुप्त नवरात्र में कलश स्थापना की जाती है. नौ दिन तक व्रत का संकल्प लेकर प्रतिदिन सुबह-शाम मां दुर्गा की अराधना इस दौरान की जाती है. साथ ही अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत की समाप्ति होती है. तंत्र साधना करने वाले इस दौरान माता के 10 महाविद्याओं की साधना करते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज