Gupt Navratri 2021: गुप्त नवरात्रि की नवमी को करें देवी मातंगी की पूजा, जानें स्वरुप, मंत्र एवं स्तुति

गुप्त नवरात्रि की नवमी पर देवी मातंगी की पूजा की जाती है (credit: instagram/spiritual_world_devote_290)

गुप्त नवरात्रि की नवमी पर देवी मातंगी की पूजा की जाती है (credit: instagram/spiritual_world_devote_290)

Gupt Navratri 2021 On Navami Worship Matangi Devi: मातंगी देवी इंद्रजाल और जादू के प्रभाव को नष्ट करती हैं. देवी को वचन, तंत्र और कला की देवी भी माना गया है. मां को जूठन का भोग अर्पित किया जाता है और इन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत नहीं रखा जाता है.

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  • Last Updated: February 20, 2021, 6:37 AM IST
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Gupt Navratri 2021: आज गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि है. आज भक्त मां मातंगी की पूजा अर्चना करेंगे. नवीं महाविद्या मातंगी देवी हैं. मातंगी देवी को प्रकृति की स्वामिनी देवी बताया गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मातंगी देवी को वचन, तंत्र और कला की देवी भी माना गया है. मां मातंगी ही समस्त देवियों में ऐसी हैं जिन्हें जूठन का भोग अर्पित किया जाता है और इन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत नहीं रखा जाता है. मान्यता है यह केवल मन और वचन से ही तृप्त हो जाती हैं.

मातंगी देवी इंद्रजाल और जादू के प्रभाव को नष्ट करती हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मातंगी माता को शिव की शक्ति बताया गया है. मतंग भगवान शिव का नाम है. गृहस्थ जीवन को सुखमय बनाने, असुरों को मोहित करने और साधकों को इच्छित फल देने वाली देवी बताया गया है. आइए जानते हैं मां मातंगी का स्वरुप, मंत्र और महत्व...

देवी मातंगी का स्वरुप:

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नवीं महाविद्या देवी मातंगी गहरे नीले रंग की हैं. देवी मातंगी मस्तक पर अर्ध चन्द्र धारण करती हैं. मां के 3 ओजपूर्ण नेत्र हैं. मां रत्नों से जड़े सिंहासन पर आसीन हैं. देवी मातंगी के एक हाथ में गुंजा के बीजों की माला है. देवी के दायें हाथों में वीणा तथा कपाल है तथा बायें हाथों में खड़ग है. देवी मातंगी अभय मुद्रा में हैं. देवी मातंगी के संग तोता भी है जो वाणी और वाचन का प्रतीक माना जाता है.
देवी मातंगी का मंत्र:

स्फटिक की माला से बारह माला 'ऊँ ह्नीं ऐ भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा:' मंत्र का जाप कर सकते हैं . माता मातंगी के कुछ प्रसिद्ध नाम हैं- सुमुखी, लघुश्यामा या श्यामला, राज-मातंगी, कर्ण-मातंगी, चंड-मातंगी, वश्य-मातंगी, मातंगेश्वरी आदि.

देवी मातंगी की स्तुति:



श्यामवर्णा, त्रिनयना

मस्तक पर चंद्रमा

चतुर्भुजा, दिव्यास्त्र लिये

रत्नाभूषण धारिणी

गजगामिनी ,महाचांडालनी

माँ मातंगी !

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सर्व लोक वशकारिणी, महापिशाचिनी

कला, विद्या, ज्ञान प्रदायिनी

मतन्ग कन्या माँ मातंगी

हम साधक शुक जैसे हैं

ज्ञान दिला दो हमको माँ

हम करते तेरा ध्यान निरंतर

आपका हे माँ मातंगी!! (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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