Gupt Navratri 2021: मातंगी देवी इंद्रजाल और जादू को करती हैं नष्ट, पढ़े कथा


मातंगी देवी की कथा (साभार: instagram/an_artistic_ambience)

मातंगी देवी की कथा (साभार: instagram/an_artistic_ambience)

Gupt Navratri 2021 Read Matangi Devi Katha- मातंगी देवी एक मात्र ऐसी देवी हैं जिनका व्रत नहीं रखा जाता है और जिन्हें जूठन का प्रसाद अर्पित किया जाता है. आइए पढ़ें मातंगी देवी की कथा...

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  • Last Updated: April 4, 2021, 11:46 AM IST
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Gupt Navratri 2021 Read Matangi Devi Katha- आज गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि है. नवमी के दिन मातंगी माता की पूजा-अर्चना की जाती है. मातंगी देवी को प्रकृति और वाक्-शक्ति की देवी माना गया है. मातंगी देवी इंद्रजाल और जादू के प्रभाव को नष्ट करती हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मातंगी माता को शिव की शक्ति बताया गया है. मतंग भगवान शिव का नाम है. गृहस्थ जीवन को सुखमय बनाने, असुरों को मोहित करने और साधकों को इच्छित फल देने वाली देवी बताया गया है. मातंगी देवी एक मात्र ऐसी देवी हैं जिनका व्रत नहीं रखा जाता है और जिन्हें जूठन का प्रसाद अर्पित किया जाता है. आइए पढ़ें मातंगी देवी की कथा...

मातंगी देवी की कथा:

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और उनकी पत्नी लक्ष्मी जी, भगवान शिव तथा पार्वती से मिलने हेतु उनके निवास स्थान कैलाश शिखर पर गए. भगवान विष्णु अपने साथ कुछ खाने की सामग्री ले गए तथा उन्होंने वह खाद्य प्रदार्थ शिव जी को भेंट स्वरूप प्रदान की. भगवान शिव तथा पार्वती ने, उपहार स्वरूप प्राप्त हुए वस्तुओं को खाया, भोजन करते हुए खाने का कुछ अंश नीचे धरती पर गिरे; उन गिरे हुए भोजन के भागों से एक श्याम वर्ण वाली देवी ने जन्म लिया, जो मातंगी नाम से विख्यात हुई.

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देवी का प्रादुर्भाव उच्छिष्ट भोजन से हुआ, परिणामस्वरूप देवी का सम्बन्ध उच्छिष्ट भोजन सामग्रियों से हैं तथा उच्छिष्ट वस्तुओं से देवी की आराधना होती हैं. देवी उच्छिष्ट मातंगी नाम से जानी जाती हैं.

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार पार्वती देवी ने, अपने पति भगवान शिव से अपने पिता हिमालय राज के यहां जाकर, अपने माता तथा पिता से मिलने की अनुमति मांगी. परन्तु, भगवान शिव नहीं चाहते थे की वे उन्हें अकेले छोड़ कर जाये. भगवान शिव के सामने बार-बार प्रार्थना करने पर, उन्होंने देवी को अपने पिता हिमालय राज के घर जाने की अनुमति दे दी. साथ ही उन्होंने एक शर्त भी रखी कि! वे शीघ्र ही माता-पिता से मिलकर वापस कैलाश आ जाएंगी. तदनंतर, अपनी पुत्री पार्वती को कैलाश से लेने हेतु, उनकी माता मेनका ने एक बगुला वाहन स्वरूप भेजा.

कुछ दिन पश्चात भगवान शिव, बिना पार्वती के विरक्त हो गए तथा उन्हें वापस लाने का उपाय सोचने लगे; उन्होंने अपना भेष एक आभूषण के व्यापारी के रूप में बदला तथा हिमालय राज के घर गए. देवी इस भेष में देवी पार्वती की परीक्षा लेना चाहते थे, वे पार्वती के सामने गए और अपनी इच्छा अनुसार आभूषणों का चुनाव करने के लिया कहा. पार्वती ने जब कुछ आभूषणों का चुनाव कर लिया तथा उनसे मूल्य ज्ञात करना चाहा! व्यापारी रूपी भगवान शिव ने देवी से आभूषणों के मूल्य के बदले, उनसे प्रेम की इच्छा प्रकट की. देवी पार्वती अत्यंत क्रोधित हुई अंततः उन्होंने अपनी अलौकिक शक्तिओं से उन्होंने पहचान ही लिया. तदनंतर देवी प्रेम हेतु तैयार हो गई तथा व्यापारी से कुछ दिनों पश्चात आने का निवेदन किया.



कुछ दिनों पश्चात देवी पार्वती भी भेष बदल कर,भगवान शिव के सामने कैलाश पर्वत पर गईं .भगवान शिव अपने नित्य संध्योपासना के तैयारी कर रहे थे. देवी पार्वती लाल वस्त्र धारण किये हुए, बड़ी-बड़ी आंखें कर, श्याम वर्ण तथा दुबले शरीर से युक्त अपने पति के सनमुख प्रकट हुई.भगवान शिव ने देवी से उनका परिचय पूछा, देवी ने उत्तर दिया कि वह एक चांडाल की कन्या हैं तथा तपस्या करने आई हैं. भगवान शिव ने देवी को पहचान लिया तथा कहा! वे तपस्वी को तपस्या का फल प्रदान करने वाले हैं. यह कहते हुए उन्होंने देवी का हाथ पकड़ लिया और प्रेम में मग्न हो गए. तत्पश्चात, देवी ने भगवान शिव से वार देने का निवेदन किया; भगवान शिव ने उनके इसी रूप को चांडालिनी वर्ण से अवस्थित होने का आशीर्वाद प्रदान किया तथा कई अलौकिक शक्तियां प्रदान की. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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