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550वां प्रकाश पर्व: पढ़ें गुरुनानक देव जी के ये दोहे

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Updated: November 11, 2019, 1:58 PM IST
550वां प्रकाश पर्व: पढ़ें गुरुनानक देव जी के ये दोहे
गुरुनानक 550वां प्रकाश पर्व

गुरुनानक 550वां प्रकाश पर्व: गुरु नानक देव ने सिख धर्म की स्थापना की थी...

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  • Last Updated: November 11, 2019, 1:58 PM IST
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गुरुनानक 550वां प्रकाश पर्व: 12 नवंबर को सिखों के गुरु 'गुरु नानक देव' का 550वां प्रकाश पर्व (Guru Nanak Dev Prakash Parv) है. सिख धर्म की स्थापना गुरु नानक देव ने ही की थी. पंजाबी भाषा में लिखे उसके सूफी उपदेश, दोहे और कविताएं आज भी दोनों के लिए काफी प्रेरणादायक हैं. उन्हें कई भाषाओं (हिंदी, संस्कृत और फ़ारसी) का गहरा ज्ञान था. उन्हें कई कविताओं और दोहों की रचना की. आइए उनके 550वें प्रकाश पर्व पर पढ़ते हैं कुछ दोहे...

 गुरुनानक देव जी के दोहे:

1. साचा साहिबु साचु नाइ
भाखिआ भाउ अपारू

आखहि मंगहि देहि देहि.

हिंदी अर्थ: प्रभु सत्य एवं उसका नाम सत्य है.
अलग अलग विचारों एवं भावों तथा बोलियों में उसे भिन्न भिन्न नाम दिये गये हैं.
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प्रत्येक जीव उसके दया की भीख माॅगता है तथा सब जीव उसके कृपा का अधिकारी है
और वह भी हमें अपने कर्मों के मुताबिक अपनी दया प्रदान करता है.

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2. करमी आवै कपड़ा, नदरी मोखु दुआरू,
नानक एवै जाणीऐ, सभु आपे सचिआरू,
दाति करे दातारू.

हिंदी अर्थ: अच्छे बुरे कर्मों से यह शरीर बदल जाता है-मोक्ष नही मिलती है.
मुक्ति तो केवल प्रभु कृपा से संभव है.
हमें अपने समस्त भ्रमों का नाश करके ईश्वर तत्व का ज्ञान प्राप्त करना चाहिये.
हमें प्रभु के सर्वकत्र्ता एवं सर्वव्यापी सत्ता में विश्वास करना चाहिये.

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3. एक ओंकार सतिनाम, करता पुरखु निरभऊ.
निरबैर, अकाल मूरत, अजुनी, सैभं गुर प्रसादि.

हिंदी अर्थ: ईश्वर एक है और वह सर्वत्र (हर जगह), हर कोने में व्याप्त है,
वही परमपिता है. इसलिए सबके साथ मिलजुलकर प्यार से रहना चाहिए.

4. हरि बिनु तेरो को न सहाई,
काकी मात-पिता सुत बनिता, को काहू को भाई.
धनु धरनी अरु संपति सगरी जो मानिओ अपनाई,
तन छूटै कुछ संग न चालै, कहा ताहि लपटाई.

हिंदी अर्थ: ईश्वर (हरि) के बिना तेरा कोई सहारा नहीं है,
मां, काकी, पिता और पुत्र, तू ही तो है दूसरा कोई नहीं.

 

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First published: November 8, 2019, 12:04 PM IST
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