Guru Purnima 2020: बेहद खास है वर्ष 2020 की गुरु पूर्णिमा, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

गुरु पूर्णिमा की पूजा को सफल बनाने के लिए, उसे सही मुहूर्त और सही पूजन विधि के अनुसार करना अनिवार्य होता है.
गुरु पूर्णिमा की पूजा को सफल बनाने के लिए, उसे सही मुहूर्त और सही पूजन विधि के अनुसार करना अनिवार्य होता है.

वर्ष 2020 में ये पर्व कई मायनों में ख़ास रहने वाला है क्योंकि इस पर्व के दिन ही वर्ष का तीसरा चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) भी घटित होगा. ज्योतिषियों के अनुसार, गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) पर होने वाली हर प्रकार की पूजा व अन्य दूसरे धार्मिक अनुष्ठानों को, एक निर्धारित मुहूर्त के अनुसार ही करना उचित रहेगा.

  • Share this:
हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को देशभर में गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) मनाई जाती है. इस दिन गुरु व अपने इष्ट देव की आराधना की जाती है. वर्ष 2020 में ये पर्व कई मायनों में ख़ास रहने वाला है क्योंकि इस पर्व के दिन ही वर्ष का तीसरा चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) भी घटित होगा. ऐसे में एस्ट्रोसेज के विशेषज्ञ ज्योतिषियों के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर होने वाली हर प्रकार की पूजा व अन्य दूसरे धार्मिक अनुष्ठानों को, एक निर्धारित मुहूर्त के अनुसार ही करना उचित रहेगा.

गुरु पूर्णिमा 2020 मुहूर्त
जुलाई 4, 2020 को 11:35:57 से पूर्णिमा आरम्भ
जुलाई 5, 2020 को 10:16:08 पर पूर्णिमा समाप्त
इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण 5 जुलाई, रविवार के दिन पड़ रहा है जो एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा. इसलिए गुरु पूर्णिमा पर होने वाली सभी पूजा, ऊपर दिए गए मुहूर्त अनुसार ही करना सही होगा. हिन्दू पंचांग की मानें तो अपने गुरु, आराध्य, इष्ट देव व श्री व्यास जी की पूजा करने के लिए आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि का सूर्योदय के बाद, तीन मुहूर्त तक व्याप्त होना आवश्यक होता है. इसके अलावा यदि किसी कारणवश, ये पूर्णिमा तिथि तीन मुहूर्त से कम हो तो, इस स्थिति में इस पर्व को पहले दिन ही मनाए जाने का विधान है.



गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि

गुरु पूर्णिमा की पूजा को सफल बनाने के लिए, उसे सही मुहूर्त और सही पूजन विधि के अनुसार करना अनिवार्य होता है. ऐसे में आइये अब जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा के दिन, कैसे करें अपने गुरु देव को प्रसन्न.

गुरु पूर्णिमा के दिन, सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.

इसके बाद अपने गुरु का आशीर्वाद लेने उनके पास जाएं, या अगर किसी कारणवश ऐसा संभव न हो तो, अपने इष्ट देव की तस्वीर या चित्र को घर के एक स्वच्छ स्थान पर रखें.

इसके बाद अपने गुरु या उनकी तस्वीर को किसी ऊँचे पवित्र आसन पर विराजमान कर, उन्हें ताजे पुष्प की माला पहनाएं.

अब उन्हें तिलक और फल आदि अर्पित कर, अपनी श्रद्धानुसार दक्षिणा दें.

इसके बाद पूर्ण आस्था के साथ अपने गुरु की पूजा करें और उनका आशीर्वाद लें.

माना जाता है कि इस दिन अपने गुरु (शिक्षक) के साथ-साथ, जीवन का पाठ सिखाने वाले अग्रज लोग जैसे- माता-पिता, भाई-बंधु, कोई विशेष व्यक्ति, घर के बड़े-बुजुर्ग, आदि का भी आशीर्वाद लेना उचित होता है.

इसके पश्चात अंत में, इस दिन विशेष तौर पर अपने गुरु से कोई भी एक गुरु मंत्र ज़रूर लें और उसे अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करें. (साभार-Astrosage.com)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज