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Guru Ravidas Jayanti 2021: संत रविदास के प्रेरणादायक विचारों से दें जयंती की शुभकामनाएं

Guru Ravidas Jayanti 2021: संत रविदास के प्रेरणादायक विचारों से दें जयंती की शुभकामनाएं

संत रविदास के प्रेरणादायक विचार जानें (credit: instagram/bnbahujannayak)

संत रविदास के प्रेरणादायक विचार जानें (credit: instagram/bnbahujannayak)

Guru Ravidas Jayanti 2021 Motivational Quotes- गुरु रविदास जी मानवीय एकता के प्रबल समर्थक एवं जातिगत भेदभाव के प्रबल विरोधी थें. गुरु रविदास जी ईश्वरीय शक्ति में पूर्ण यकीन और विश्वास रखते थे.

    Guru Ravidas Jayanti 2021 Motivational Quotes- आज रविदास देश भर में बड़ी धूमधाम से मनाई जा रही है. रविदास जयंती या प्रकाश उत्सव मनाते हैं. इस अवसर पर बड़ी-बड़ी शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं, जिन्हें नगर कीर्तन भी कहा जाता है. इन शोभा यात्राओं में गुरु रविदास जी के शिष्य उनके दोहे और विचारों को जो कि वाणी के रुप में संग्रहित हैं, उनका गायन करते हैं.

    कई जगहों पर गुरु रविदास के शिष्य, माघ पूर्णिमा के एक दिन पूर्व उनकी प्रतिमा स्थापित करते हैं. विधि विधान से उनका पूजन अर्चन करते हैं और अगले दिन, प्रतिमा को नदी या तालाब में विसर्जित कर देते हैं.

    सिख धर्म के अनुयायी भी बड़ी श्रद्धा भावना से, गुरु रविदास जयंती पर गुरुद्वारों में आयोजित करते हैं. इस अवसर पर पूर्णिमा से दो दिन पूर्व, गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ रखा जाता है, और उस पाठ की समाप्ति पूर्णिमा के दिन होती है. इसके पश्चात कीर्तन दरबार होता है, जिसमें रागी जत्था गुरु रविदास जी की वाणियों का गायन करते हैं.

    इसके अलावा गुरु रविदास जयंती के अवसर पर, सत्संग एवं विचार गोष्ठी का आयोजन भी होता है. इसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एकत्रित होते हैं. वहां गुरु रविदास जी के विचारों पर परिचर्चा एवं उनकी वाणियों का सामूहिक गायन होता है.

    गुरु रविदास जी भक्ति आंदोलन के अगुवाई माने जाते हैं. जिन्होंने भारतवर्ष में व्याप्त जाति प्रथा की कुरीतियों के खिलाफ, क्रांतिकारी स्वर बुलंद किया और अपनी पवित्र वाणी के माध्यम में समाज में समता और बराबरी का संदेश दिया. ऐसे में गुरु रविदास जी की जयंती का उनके अनुयायियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थान हासिल है. गुरु रविदास जी के अनुयायी, इसे महापर्व के रुप में मनाते हैं.

    गुरु रविदास जी के विचार
    गुरु रविदास जी मानवीय एकता के प्रबल समर्थक एवं जातिगत भेदभाव के प्रबल विरोधी थें. गुरु रविदास जी ईश्वरीय शक्ति में पूर्ण यकीन और विश्वास रखते थें. उनकी वाणियों में उनके विचार स्पष्ट रुप से कहते हैं कि, इस धरती पर जन्मा कोई भी व्यक्ति अपनी जाति या जन्म की वजह से नहीं अपने कर्म के कारण ही ऊंचा या नीचा होता है. ये गुरु रविदास जी के ही विचार थें कि, “मन चंगा तो कठौती में गंगा!”, अर्थात मन शुद्ध हो तो घर की कठौती का जल ही गंगाजल समान पवित्र हो जाता है. गुरु रविदास जी ने संदेश दिया कि परमात्मा ने इंसान की रचना की है, न कि इंसान ने परमात्मा का सृजन किया है. अतः सभी मानवों के अधिकार समान है. गुरु रविदास जी की विचारधारा से ही प्रभावित होकर, तत्कालीन चित्तौड़ साम्राज्य के राजा और रानी भी, उनके शिष्य बन गए थे. (साभार: astrosage.com)

    Tags: Religion

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