Hanuman Jayanti 2021: इस विशेष मंदिर में 3 बार बदल जाता है हनुमान जी का स्वरूप, ये है पौराणिक कथा

यह मंदिर नर्मदा के किनारे बना हुआ है, जहां सूर्य की सीधी किरणें नर्मदा पर पड़ती हैं.

यह मंदिर नर्मदा के किनारे बना हुआ है, जहां सूर्य की सीधी किरणें नर्मदा पर पड़ती हैं.

Hanuman Jayanti 2021: मंदिर के पुजारी की मानें तो सुबह चार बजे से दस बजे तक हनुमान जी की प्रतिमा का बाल स्वरूप रहता है और दस बजे से शाम 6 बजे तक युवा व 6 बजे से पूरी रात वृद्ध स्वरूप हो जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2021, 11:03 AM IST
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Hanuman Jayanti Special: हनुमान जयंती के अवसर पर एक ऐसे हनुमान जी (Hanuman Ji) के बारे में जानते हैं जिनके बारे में ये कहावत है कि इस मंदिर में लगी मूर्ति का रूप चौबीस घंटे में तीन बार बदलता है. ऐसा कहा जाता है कि हनुमान जी की प्रतिमा का सुबह के समय बाल स्वरूप, दोपहर में युवा और फिर शाम ढलने के बाद से पूरी रात वृद्ध रूप हो जाता है. आइए जानते हैं कि हनुमान जी के इस मंदिर के बारे में, क्यों बदलता है उनका स्वरूप और इस मंदिर की विशेषता...

मंडला से करीब तीन किलोमीटर दूर पुरवागांव में श्रद्धा और भक्ति का एक प्राचीन केन्द्र है, जिसे सूरजकुंड कहा जाता है. यहां पर हनुमान जी का एक प्राचीन मंदिर है. मंदिर में प्रतिष्ठित हनुमान जी के त्वचा का रंग अत्यंत ही दुर्लभ पत्थर से निर्मित है और उनकी आदमकद प्रतिमा रामायणकाल की घटनाओं का विवरण देती है. हनुमानजी का चेहरा आकर्षण और तेज लिए हुए है, जिससे दिव्यता और असीम शांति का अनुभव होता है. मंदिर में विराजमान हनुमान जी की इस दुर्लभ मूर्ति की खासियत यह है कि ये चौबीस घंटो में प्राकृतिक तरीके से तीन बार अपना रूप बदलती है.

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मंदिर के पुजारी की मानें तो सुबह चार बजे से दस बजे तक हनुमान जी की प्रतिमा का बाल स्वरूप रहता है और दस बजे से शाम 6 बजे तक युवा व 6 बजे से पूरी रात वृद्ध स्वरूप हो जाता है. तीन स्वरूप वाले इस चमत्कारी हनुमान जी के मंदिर में बड़ी दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. स्थानीय लोग और भक्तों की मानें तो सूरजकुंड के मंदिर में विराजमान हनुमान जी की यह प्रतिमा दुर्लभ है. ऐसी प्रतिमा और कहीं देखने को नहीं मिलती है. मंदिर में पहुंचने वाले सभी भक्तों को इस मंदिर के प्रति बड़ी आस्था है. कहा जाता है जो भी इस मंदिर में आता है और अर्जी लगाता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है.
इतिहासकारों के मुताबिक यह मंदिर नर्मदा के किनारे बना हुआ है, जहां सूर्य की सीधी किरणें नर्मदा पर पड़ती हैं, तो एक आलौकिक सौंदर्य उत्पन्न होता है. कहते हैं यहां पर भगवान सूर्य तपस्या करते थे. भगवान सूर्य की तपस्या में विघ्न न पड़े इसलिए हनुमान जी यहां पर पहरा दिया करते थे. जैसे ही भगवान सूर्य की तपस्या पूरी हुई तो भगवान सूर्य अपने लोक की ओर जाने लगे, जिसके बाद हनुमान जी को भगवान सूर्य ने यहीं रुकने के लिए कह दिया. इसके बाद हनुमान जी यहीं मूर्ती के रूप में रुक गए. कहा जाता है कि भगवान सूर्य की किरणों के साथ ही भगवान हनुमान अपने बाल रूप में नजर आते हैं. इसके बाद अलग-अलग पहर में अपने रूप बदलते हैं. सूर्यकुंड कलयुग में हनुमान हैं इसका सही प्रमाण भी मिलता है.
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